मध्यप्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को सेवा अवधि की गणना से जुड़े मामले में राहत मिली है। जबलपुर हाईकोर्ट ने प्रथम नियुक्ति से सेवा की गणना करने के अपने आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से शिक्षकों को सीनियरिटी, वेतन बढ़ोतरी, पेंशन समेत अन्य सेवा लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है।
इस मामले में राज्य सरकार की SLP को सुप्रीम कोर्ट 24 अगस्त 2026 को खारिज कर चुका है। इसके बाद शिक्षकों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश के पालन के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर के चौथे सप्ताह में होगी।
2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने की मांग
शिक्षकों का कहना है कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ वर्ष 2016 से दिया जा रहा है। शिक्षकों का तर्क है कि यदि पहली नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना की जाती है, तो उन्हें 2006 से ही वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। इसके चलते करीब 10 साल के बकाया एरियर की मांग की जा रही है।
हर शिक्षक को 7 से 8 लाख रुपए तक का लाभ?
शिक्षकों के मुताबिक, बकाया एरियर का भुगतान होने पर प्रत्येक शिक्षक को करीब 7 से 8 लाख रुपए तक का लाभ मिल सकता है। इसके अलावा 12 प्रतिशत ब्याज दिए जाने की बात भी सामने आई है।
497 शिक्षकों ने शुरू की थी कानूनी लड़ाई
इस मामले में राजेश पांडेय समेत 497 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कानूनी लड़ाई शुरू की थी। शिक्षकों का कहना था कि शिक्षा विभाग में संविलियन के दौरान वर्ष 2018 से पहले की उनकी शिक्षकीय सेवा को मान्यता नहीं दी गई।शिक्षकों ने मांग की थी कि उनकी सेवा अवधि को पहली नियुक्ति से माना जाए, ताकि सीनियरिटी, वेतन वृद्धि, पेंशन और अन्य सेवा लाभ भी उसी आधार पर निर्धारित किए जा सकें।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी सरकार
हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बाद राज्य सरकार ने SLP दाखिल कर इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की SLP खारिज कर दी। इसके बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आदेश का पालन कराने की मांग की।
शिक्षक बोले- आदेश पर जल्द हो कार्रवाई
शिक्षक नेता उपेंद्र कौशल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से मामला खारिज होने के बाद अब सरकार को हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करनी चाहिए। शिक्षकों को उम्मीद है कि पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने के साथ लंबित सेवा लाभ भी उन्हें मिलेंगे।