भोपाल. मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता सामने आई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट ने राज्य की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जबरन शादी के उद्देश्य से होने वाली मानव तस्करी के मामलों में मध्यप्रदेश अब देश का सबसे प्रभावित राज्य बन गया है। यह स्थिति इसलिए और अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे अपराधों में कमी दर्ज की गई है, जबकि मध्यप्रदेश में हालात जस के तस बने हुए हैं। रिपोर्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और महिला संरक्षण तंत्र पर कई कठिन सवाल खड़े कर दिए हैं।
देश के कुल मामलों में अकेले मध्यप्रदेश की बड़ी हिस्सेदारी
6 मई को जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में पूरे देश में जबरन शादी के लिए मानव तस्करी के कुल 98 मामले दर्ज किए गए। इनमें से अकेले 21 मामले मध्यप्रदेश से सामने आए। इसका अर्थ है कि देश में दर्ज हर पांच में से एक मामला मध्यप्रदेश से जुड़ा हुआ है। यह आंकड़ा राज्य की स्थिति को बेहद भयावह बनाता है। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 20 क्षेत्रों में यह अपराध सक्रिय रूप से दर्ज किया गया, लेकिन मध्यप्रदेश सभी को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष पर पहुंच गया। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और दिल्ली जैसे बड़े राज्यों की तुलना में भी मध्यप्रदेश की स्थिति अधिक गंभीर दिखाई दी।
लगातार कई वर्षों से बनी हुई है चिंताजनक स्थिति
रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार गहराता जा रहा है। वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश 39 मामलों के साथ असम के बाद दूसरे स्थान पर था। इसके बाद वर्ष 2023 में भी राज्य में 21 मामले दर्ज हुए और वह जम्मू-कश्मीर के बाद दूसरे स्थान पर बना रहा। लेकिन वर्ष 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर मामलों की संख्या 124 से घटकर 98 हो गई, जबकि मध्यप्रदेश में मामलों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। यही कारण है कि राज्य अब इस सूची में देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति अपराध नियंत्रण तंत्र की सीमाओं और सामाजिक जागरूकता की कमी दोनों को दर्शाती है।
ग्रामीण और कमजोर वर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर
विशेषज्ञों का मानना है कि जबरन शादी के लिए मानव तस्करी के मामलों में सबसे अधिक प्रभावित गरीब, ग्रामीण और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग की लड़कियां होती हैं। रोजगार, शिक्षा या बेहतर भविष्य का झांसा देकर उन्हें दूसरे राज्यों या क्षेत्रों में ले जाया जाता है और बाद में जबरन विवाह या शोषण का शिकार बनाया जाता है। कई मामलों में पीड़ित लड़कियों का पता लंबे समय तक नहीं चल पाता। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आर्थिक असमानता, शिक्षा की कमी और जागरूकता का अभाव इस अपराध को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण हैं।
प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा तंत्र पर दबाव बढ़ गया है। विपक्ष भी सरकार पर सवाल उठा रहा है कि लगातार वर्षों से स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पाया। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अपराध दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानव तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने, पीड़ितों के पुनर्वास और सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। इसके साथ ही पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
सामाजिक चेतना और सख्त कार्रवाई ही समाधान
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के अपराधों पर नियंत्रण केवल कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं होगा। समाज स्तर पर जागरूकता, बालिका शिक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक अवसर और महिला सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। मानव तस्करी केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना और संवेदनशीलता से जुड़ा गंभीर संकट है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले वर्षों में और विकराल रूप ले सकती है।