इंदौर- मध्य प्रदेश में मानसून की देरी और लगातार पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। प्रदेशभर में हरी सब्जियों की आवक में भारी कमी दर्ज की जा रही है, जिससे टमाटर, गिलकी, लौकी, पालक और बैंगन जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। इंदौर सहित कई शहरों में सब्जियों की कीमतें पिछले कुछ दिनों में काफी ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
टमाटर के दामों में सबसे ज्यादा उछाल
सब्जी कारोबारियों के अनुसार सबसे अधिक असर टमाटर की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। खुदरा बाजार में टमाटर 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इसके अलावा गिलकी भी 60 रुपये किलो, लौकी 40 से 50 रुपये किलो, पालक 40 से 50 रुपये किलो और बैंगन करीब 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
मानसून में देरी और गर्मी से उत्पादन प्रभावित
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार और लंबे समय तक बनी रही भीषण गर्मी ने सब्जियों के उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई क्षेत्रों में फसलें समय से पहले खराब हो गईं, जबकि नई फसल की बुवाई भी प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर बाजार में उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
राजस्थान से सप्लाई बंद, महाराष्ट्र पर बढ़ी निर्भरता
हर साल गर्मी के मौसम में मध्य प्रदेश की मंडियों में राजस्थान से बड़ी मात्रा में सब्जियां पहुंचती हैं, लेकिन इस बार अत्यधिक तापमान के कारण वहां की फसलें समय से पहले खराब हो गईं। इसके चलते राजस्थान से आने वाली सप्लाई लगभग बंद हो गई है। अब प्रदेश की मंडियां महाराष्ट्र के कन्नड़, चालीसगांव, संभाजीनगर और कलवन जैसे क्षेत्रों से आने वाली सब्जियों पर निर्भर हैं, लेकिन वहां भी गर्मी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है।
इंदौर मंडी में सुविधाओं की कमी से बढ़ी परेशानी
व्यापारियों का कहना है कि इंदौर की चोइथराम मंडी में सब्जियों के संरक्षण के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। मंडी में न तो पर्याप्त शेड मौजूद हैं और न ही सब्जियों को सुरक्षित रखने की समुचित व्यवस्था है। तेज धूप में रखी सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है और इसका असर कीमतों पर भी पड़ता है।
आवक घटी, मांग बनी हुई
मंडी व्यापारियों के मुताबिक सामान्य दिनों में जहां रोजाना 100 से 200 ट्रक सब्जियां मंडी पहुंचती थीं, वहीं इन दिनों केवल 20 से 25 गाड़ियां ही पहुंच रही हैं। दूसरी ओर बाजार में मांग लगभग सामान्य बनी हुई है। मांग और आपूर्ति के इस असंतुलन ने सब्जियों के दामों में तेज उछाल ला दिया है।
मानसून सक्रिय होने तक राहत मुश्किल
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता और नई फसल की आवक शुरू नहीं होती, तब तक सब्जियों की कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति के आधार पर ही कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है।