नर्मदापुरम. नर्मदा नदी के प्रमुख घाटों पर अब भिक्षावृत्ति पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट और उपखंड मजिस्ट्रेट देवेन्द्र प्रताप सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी किए हैं। इसके तहत सेठानी घाट, कोरी घाट और पर्यटन घाट सहित प्रमुख स्थलों पर भीख मांगने और उससे जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि घाटों की धार्मिक गरिमा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।
पुनर्वास और संरक्षण पर रहेगा प्रशासन का फोकस
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल प्रतिबंध तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भिक्षावृत्ति में शामिल लोगों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी एनएचआरसी की एडवाइजरी के आधार पर नगर निकाय और अन्य विभाग मिलकर गरीब, अशिक्षित बच्चों, महिलाओं और दिव्यांग भिक्षुकों के लिए आश्रय, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन का उद्देश्य भिक्षावृत्ति समाप्त करने के साथ जरूरतमंद लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना भी है।
शहर को भिक्षामुक्त बनाने की मुहिम को मिला समर्थन
कलेक्टर की इस पहल को शहर के व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने सराहनीय बताया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी लोगों से अपील की है कि वे सड़कों, दुकानों और घाटों पर भीख देने की परंपरा बंद करें। उनका कहना है कि यदि नकद सहायता बंद होगी तो भिक्षावृत्ति स्वतः कम होने लगेगी। साथ ही जरूरतमंदों के लिए एक निश्चित स्थान पर भोजन और सहायता की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
पांच रुपये के भोजन कूपन से होगी मदद
मध्य प्रदेश सरकार की कल्याणकारी भोजन योजना को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। इसके तहत गरीब और बेसहारा लोगों को मात्र पांच रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाता है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे नकद पैसे देने के बजाय पांच रुपये के भोजन कूपन उपलब्ध कराएं, ताकि जरूरतमंदों को भोजन मिल सके और भीख मांगने की प्रवृत्ति कम हो। अधिकारियों का मानना है कि इससे शहर में भिक्षावृत्ति की संख्या धीरे-धीरे समाप्त हो सकती है।
नर्मदा घाटों पर बड़ी संख्या में सक्रिय हैं भिक्षुक
जानकारी के अनुसार नर्मदा घाटों पर सैकड़ों की संख्या में भिक्षुक सक्रिय हैं। सबसे ज्यादा संख्या सेठानी घाट, पर्यटन घाट, कोरी घाट और विवेकानंद घाट पर देखने को मिलती है। धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं से नकद सहायता प्राप्त करना इनका प्रमुख माध्यम बना हुआ था। अब प्रशासन इन लोगों की पहचान कर उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की दिशा में कार्य शुरू करने जा रहा है।
धार्मिक गरिमा और सामाजिक सुधार दोनों पर जोर
प्रशासन का मानना है कि यह पहल केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। नर्मदा घाटों की पवित्रता बनाए रखने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में अन्य धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।