उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महापर्व-2028 की तैयारियों को गति देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने कान्ह डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना का विस्तृत अवलोकन किया और निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए लगभग 100 फीट गहरी भूमिगत टनल में भी उतरकर निरीक्षण किया। अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति, तकनीकी विशेषताओं और निर्धारित समय-सीमा के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
शिप्रा नदी को स्वच्छ रखने की बड़ी योजना
सिंहस्थ महापर्व के दौरान करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं और शिप्रा नदी का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कान्ह डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना को विकसित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य कान्ह नदी के दूषित जल को शिप्रा नदी में मिलने से रोकना है, ताकि सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ और पवित्र जल उपलब्ध हो सके। सरकार का मानना है कि यह परियोजना न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
919 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली परियोजना
यह परियोजना लगभग 919 करोड़ 94 लाख रुपये की लागत से विकसित की जा रही है। इसकी कुल लंबाई 30.15 किलोमीटर निर्धारित की गई है, जिसमें 18.15 किलोमीटर लंबा कट-एंड-कवर डक्ट और 12 किलोमीटर लंबी भूमिगत टनल शामिल है। परियोजना का डिजाइन आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है ताकि लंबे समय तक इसकी उपयोगिता बनी रहे और शिप्रा नदी को प्रदूषण से बचाया जा सके।
अगले 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हुआ मॉडल
अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना को केवल सिंहस्थ-2028 तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। अगले 25 वर्षों में संभावित जनसंख्या वृद्धि और शहरी विस्तार को देखते हुए इसकी क्षमता निर्धारित की गई है। परियोजना अधिकतम 40 क्यूमेक्स दूषित जल की निकासी करने में सक्षम होगी, जिससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में जल प्रबंधन की स्थिति भी बेहतर होगी।
रखरखाव और सफाई के लिए विशेष व्यवस्था
परियोजना के सुचारु संचालन और नियमित रखरखाव को ध्यान में रखते हुए इसमें चार विशेष शाफ्ट भी बनाए जा रहे हैं। इन शाफ्टों की सहायता से टनल और डक्ट की सफाई, निरीक्षण तथा मरम्मत कार्य आसानी से किए जा सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी व्यवस्था भविष्य में परियोजना की कार्यक्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और किसी भी तकनीकी समस्या का समाधान शीघ्रता से किया जा सकेगा।
गुणवत्ता और समय-सीमा पर मुख्यमंत्री का विशेष जोर
निरीक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। इसलिए सभी परियोजनाओं का समय पर पूरा होना आवश्यक है ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।