Tekanpur | मध्य प्रदेश के टेकनपुर स्थित BSF अकादमी का राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र अब देश के सुरक्षा बलों और पुलिस के साथ-साथ विदेशी सुरक्षा बलों के डॉग्स को भी प्रशिक्षण दे रहा है। वर्तमान में भूटान के सुरक्षा बलों के बेल्जियन मेलिनोइस डॉग्स यहां प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनके साथ आए हैंडलर्स को भी BSF के विशेषज्ञ प्रशिक्षण दे रहे हैं। केंद्र में पंजाब और उत्तर प्रदेश पुलिस के डॉग्स भी अलग-अलग प्रशिक्षण विधाओं में तैयार किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर संचालित इस केंद्र में सुरक्षा बलों की जरूरत के अनुसार डॉग्स को विशेष कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
भूटान के सुरक्षा बलों के डॉग्स ले रहे ट्रेनिंग
टेकनपुर के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में भूटान के सुरक्षा बलों के Belgian Malinois नस्ल के डॉग्स प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उनके साथ आए हैंडलर्स को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे डॉग्स की देखभाल, कमांड और ऑपरेशनल उपयोग की तकनीकों को बेहतर तरीके से समझ सकें। भूटान के सुरक्षा बलों के डॉग्स इससे पहले भी BSF के प्रशिक्षित विशेषज्ञों से ट्रेनिंग ले चुके हैं।
पंजाब और यूपी पुलिस के डॉग्स भी प्रशिक्षणरत
केंद्र में पंजाब पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस के डॉग्स भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इससे पहले भी विभिन्न राज्यों के सुरक्षा बल और पुलिस अपने डॉग्स को यहां प्रशिक्षण के लिए भेज चुके हैं। सुरक्षा बलों की जरूरत के आधार पर डॉग्स को उनकी नस्ल, क्षमता और कार्यक्षेत्र के अनुसार अलग-अलग विधाओं में तैयार किया जाता है।
नारकोटिक्स और बम डिटेक्शन की ट्रेनिंग
राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में डॉग्स को सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इनमें नारकोटिक्स डिटेक्शन, बम डिटेक्शन और अन्य सुरक्षा संबंधी कार्य शामिल हैं। इनमें मादक पदार्थों की पहचान करने वाले डॉग्स के प्रशिक्षण की मांग विशेष रूप से अधिक है। पंजाब और उत्तर प्रदेश पुलिस समेत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के डॉग्स को इस विधा में प्रशिक्षित किया जा रहा है। विदेशी और देसी दोनों नस्लों के डॉग्स को उनकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार नारकोटिक्स डिटेक्शन के लिए तैयार किया जाता है।
देसी और विदेशी नस्लों के प्रजनन पर भी काम
राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में प्रजनन केंद्र भी संचालित किया जा रहा है। यहां देसी और विदेशी दोनों नस्लों के डॉग्स के प्रजनन पर काम किया जाता है। जन्म के बाद से ही पिल्लों को उनकी क्षमता और भविष्य के कार्यक्षेत्र के अनुरूप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। इसके जरिए उन्हें आगे चलकर विभिन्न प्रशिक्षण विधाओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार किया जाता है।
देसी नस्ल के डॉग्स को बढ़ावा देने पर जोर
केंद्र में विदेशी नस्लों के साथ-साथ देसी नस्ल के डॉग्स की संख्या बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से देसी नस्लों की क्षमता को विकसित करने और उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र इस तरह सुरक्षा बलों के लिए प्रशिक्षित डॉग्स और विशेषज्ञ हैंडलर्स तैयार करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रशिक्षण सहयोग का केंद्र बन रहा है।