पटना: बिहार में गंगा और गंडक नदियों के बढ़े जलस्तर के बीच बाढ़ का खतरा लगातार बना हुआ है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना में गंगा घाट पहुंचकर नदी के जलस्तर का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं और इस दौरान प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहना होगा।
गंगा-गंडक का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, गंगा का पानी अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। गंगा और गंडक दोनों नदियों में अब तक का सबसे अधिक जलस्तर दर्ज किया गया है। सोन नदी का जलस्तर भी उच्चतम स्तर तक पहुंचने की बात मुख्यमंत्री ने कही है। उन्होंने कहा कि बिहार में इस वर्ष सामान्य से करीब 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है, इसके बावजूद नदियों का जलस्तर इतना बढ़ना चिंता का विषय है। सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और संवेदनशील इलाकों में प्रशासनिक अमला सक्रिय है।
अगले 48 घंटे पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 48 घंटे तक राज्य में पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि राहत कार्यों में सहयोग के लिए एयरफोर्स से भी संपर्क किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में जिलाधिकारियों समेत तमाम अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक हर संभव राहत पहुंचाई जाए और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम करे।
गंडक नदी पर अत्यधिक दबाव
जल संसाधन विभाग के अनुसार, नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर कई स्थानों पर ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL से ऊपर बना हुआ है। डुमरियाघाट, गोपालगंज में गंडक का जलस्तर करीब 36 घंटे से HFL से लगभग 22 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है। वहीं रेवाघाट, सारण और लालगंज, वैशाली में भी करीब 21 घंटे से जलस्तर HFL से 22 सेंटीमीटर ऊपर रहने की जानकारी दी गई है। इससे गंडक नदी के बाएं और दाएं दोनों तटबंधों पर अत्यधिक दबाव बना हुआ है। गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण गंडक में बैकफ्लो का दबाव बढ़ गया है।
कई जगह सीपेज और पाइपिंग की स्थिति
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, अत्यधिक जल दबाव के चलते कई स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की स्थिति सामने आई है। इन संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जा रही है और तटबंधों की सुरक्षा के लिए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य चलाया जा रहा है। विभाग के अनुसार, अधिकारियों और तकनीकी टीमों को संवेदनशील स्थलों पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
पानापुर और साहेबगंज में तटबंध में ब्रिच
सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद सारण जिले के पानापुर प्रखंड में राइट सारण तटबंध में कटाव के बाद ब्रिच होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड में तिरहुत मुख्य तटबंध के अंतर्गत आने वाले एक रिंग बांध में भी ब्रिच हुआ है। हालांकि जल संसाधन विभाग का कहना है कि अन्य सभी संवेदनशील स्थल फिलहाल सुरक्षित और नियंत्रण में हैं। इन स्थानों पर लगातार निगरानी के साथ सुरक्षा और बाढ़ संघर्ष कार्य जारी है।
जलस्तर में गिरावट शुरू, लेकिन खतरा अभी टला नहीं
विभाग के मुताबिक, फिलहाल नदियों के जलस्तर में गिरावट की प्रवृत्ति शुरू हो गई है, लेकिन पानी अभी भी पुराने उच्चतम जलस्तर से ऊपर है। ऐसे में तत्काल खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा है। जल संसाधन विभाग ने अगले 48 घंटे तक हाइड्रोलिक दबाव बने रहने की संभावना जताई है। इसी वजह से तटबंधों और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत और बचाव पर सरकार की नजर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में लोगों की सुरक्षा, तटबंधों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर राहत पहुंचाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। बिहार में गंगा, गंडक और सोन नदियों के बढ़े जलस्तर के बीच आने वाले 48 घंटे प्रशासन के लिए अहम माने जा रहे हैं।