नई दिल्ली: झारखंड में 1981 में हुए दोहरे हत्याकांड का मामला करीब 44 साल तक अदालतों में चलता रहा। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान न्यायिक प्रक्रिया में हुई असाधारण देरी को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता जताई।
आरोप तय होने के बाद भी 12 साल चला ट्रायल
मामले में आरोप 1991 में तय किए गए थे, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने 2002 में जाकर आरोपियों को दोषी ठहराया। यानी आरोप तय होने के बाद भी मुकदमे को पूरा होने में करीब 12 साल लग गए। सुप्रीम कोर्ट ने इसी देरी पर सवाल उठाया कि इतने लंबे समय तक सुनवाई क्यों चलती रही।
हाई कोर्ट में अपील भी 22 साल तक लंबित रही
ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई, लेकिन वहां भी फैसला आने में करीब 22 साल लग गए। हाई कोर्ट ने 2024 में इस अपील पर निर्णय दिया। इस तरह 1981 में शुरू हुआ मामला चार दशक से ज्यादा समय तक न्यायिक प्रक्रिया में उलझा रहा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह न्याय व्यवस्था की विफलता
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इतनी लंबी देरी को बेहद गंभीर बताया। अदालत ने कहा कि यह मामला न्यायिक व्यवस्था की विफलता को सामने लाता है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट में आपराधिक अपीलों के लंबे समय तक लंबित रहने पर भी चिंता जताई।
छह आरोपियों में अब सिर्फ एक जीवित
इस मामले में शुरुआत में छह आरोपी थे। इनमें से दो की आरोप तय होने से पहले मौत हो गई, जबकि दोषी ठहराए गए चार आरोपियों में से तीन की हाई कोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान मौत हो गई। अब करीब 70 साल के साइमन सोरेन इस मामले में जीवित बचे एकमात्र आरोपी हैं।
एक ही केस पांच बार दूसरी अदालत में गया
झारखंड हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट में सामने आया कि 1991 के बाद करीब 11 वर्षों के दौरान यह मामला पांच बार अलग-अलग ट्रायल कोर्ट में ट्रांसफर हुआ। अदालत ने इस तथ्य और आपराधिक अपीलों की भारी पेंडेंसी को गंभीरता से लिया।
उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए आरोपी को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को स्वीकार करते हुए आरोपी के करीब 45 वर्षों के कानूनी संघर्ष और उसकी मौजूदा स्थिति को भी ध्यान में रखा। करीब 70 वर्षीय साइमन सोरेन की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को देखते हुए अदालत ने उसकी सजा पर रोक लगाई और निजी मुचलके की शर्त पर रिहाई का आदेश दिया।
अब 18 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट से मामले के मूल रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया है। रिकॉर्ड भौतिक और डिजिटल दोनों रूप में उपलब्ध कराने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी।