हिंदू धर्म में जिस सोमवार के दिन को औढरदानी शिव की पूजा के लिए अत्यंत ही फलदायी माना गया है, मान्यता है कि इस दिन पूजा करने पर शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। इस साल अधिक मास के पड़ जाने के कारण श्रावण मास में चार या पांच सोमवार नहीं बल्कि आठ सोमवार पड़ रहे हैं। पंचांग के अनुसार आज अधिक श्रावण मास का दूसरा और श्रावण मास का चौथा सोमवार है।
सावन सोमवार को लेकर क्या है मान्यता
अधिक मास में श्रावण सोमवार व्रत और शिव पूजा के अभिषेक आदि को लेकर बहुत से लोगों के मन में कन्फ्यूजन है कि क्या इसकी पूजा मान्य होगी कि नहीं? साथ ही इस बात की भी चिंता है कि इसका पुण्यफल मिलेगा या फिर नहीं? ऐसा सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि मलमास को भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार मलमास में कोई शुभ कार्य शुरु नहीं किया जाता है।
किसे मिलेगा अधिक सावन सोमवार का पुण्यफल
हिंदू मान्यता के अनुसार अधिक मास में किसी भी शुभ चीज की शुरुआत नहीं की जाती है। ऐसे में यदि आप सावन सोमवार का अधिक मास में प्रारंभ करने की सोच रहे हैं तो आपको इसका पुण्यफल नहीं मिलेगा, लेकिन यदि आप श्रावण सोमवार का व्रत अधिक मास लगने से पहले ही करते चले आ रहे हैं तो आपको इस व्रत एवं भगवान शिव की पूजा एवं अभिषेक आदि का पूरा पुण्यफल मिलेगा।
सावन सोमवार व्रत की पूजा विधि
आज अधिक सावन सोमवार व्रत के दिन स्नान-ध्यान करने के बाद किसी शिवालय में अथवा अपने घर में स्थापित शिवलिंग को सबसे पहले गंगाजल से स्नान कराएं उसके बाद उसका कच्चे दूध, घी, शहद, दही, पुष्प, अक्षत, बेलपत्र, शमीपत्र, भस्म, आदि से पूजन करें। इसके बाद सोमवार व्रत की कथा का पाठ और रुद्राक्ष की माला से भगवान शिव के मंत्र का जाप करें। सावन सोमवार व्रत की पूजा करने के बाद महादेव की आरती करना न भूलें।
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