गांव से लेकर शहर में, प्रदेश से लेकर देश में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की बहार है। अतिक्रमण करने वाले लोगों ने इसके कई रूप तैयार कर लिए हैं। जहां जैसा मौका मिलता है, लोग सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने से नहीं चूकते हैं। अतिक्रमण कारियों ने धर्म को अतिक्रमण करने के लिए अपना हथियार बनाया है।
कब्जे के बाद किराए का गोरखधंधा
इतना ही नहीं सरकारी जमीन पर कब्जा करने के बाद कब्जेदार इन जमीनों को दूसरे लोगों को किराए पर देकर हर महीने अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। हालांकि यह कब्जे ऐसे ही नहीं हो जाते हैं।कब्जे के पीछे मिलीभगत किसकी?
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत के कोई कैसे अवैध रूप से कब्जा कर सकता है। यह कब्जा एक-दो साल से नहीं, बल्कि कई साल से है। कई बार तो यह भी देखने में आ रहा है कि प्रशासन ने कई जगह सरकारी जमीन होने संबंधी बोर्ड तो लगा दिए, लेकिन अतिक्रमणकारी इस जमीनों पर बेखौफ डटे हुए हैं। अवैध कब्जा करने वालों ने अवैध रूप से आलीशान बंगले, कांफ्रेंस हॉल, गुफा, ग्रीन हाउस, जनरेटर हाउस, मेडिटेशन हॉल से लेकर मोबाइल टावर व पानी की ऊंची-ऊंची टंकियां तक बना ली, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को यह दिखाई नहीं देता।Written By: Dilip Pal
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