Shimla: शिमला के फागली में अचानक हुए भूस्खलन की चपेट में आने वाले परिवारों (Shimla Landslide) की चीख पुकार ने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। हादसे के बाद मदद की गुहार लगाने के बाद इलाके के लोगों ने मदद करने की कोशिश की। उन्हीं में एक नाम सलाउद्दीन बाबर का है, जो दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना ही मलबे में कूद गए।
दूसरों की जान बचाने के लिए कूदे थे मलबे में
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलाउद्दीन का छोटा भाई भी इसी मलबे में फंसा था। तबाही का मंजर देखकर हर कोई सहम गया था। भूस्खलन की वजह से मिट्टी खिसकना लगातार जारी था। आस-पास के लोग सलाउद्दीन बाबर के मलबे में उतरने की खबर सुनकर परेशान हो गए थे। बताया जा रहा है की सलाउद्दीन इलाके के एक अच्छे इंसान थे।
रेस्क्यू के दौरान कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया
हमेशा बड़ों का आदर और छोटे से प्यार करते। वह हमेशा दूसरों (Shimla Landslide) की मदद के लिए तैयार रहते थे। उनके बारे में हर कोई जानकारी जुटाना चाहता था। पुलिस को इसकी सूचना दी गई। रेस्क्यू के दौरान कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन बाबर सलाउद्दीन दूसरों को बचाने के लिए खुद मौत के आगोश में आ गए।
मौत पर इलाके के लोग हुए ग़मगीन
भूस्खलन के बाद सलाउद्दीन मलबे में उतरकर फंसे हुए लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहे थे। तभी अचानक दूसरा भूस्खलन हो गया और सलाउद्दीन बाबर उसकी चपेट में आ गए। इसके बाद प्रशासन के साथ कुछ युवक हिम्मत दिखाते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हुए, जोकि बारिश के बीच आसान नहीं था।
सोमवार दोपहर को बरामद हुआ शव
बहरहाल, रेस्क्यू में कई लोगों को बचाया गया, लेकिन सोमवार की दोपहर मलबे में सलाउद्दीन बाबर का शव बरामद हुआ। मदद के लिए मलबे में उतरने वाले बाबर की मौत से हर कोई ग़मगीन हो गया। शिमला की वह आवाज, ‘मैं सलाउद्दीन बाबर खान..., पेश है आज के मुख्य समाचार’ भी हमेशा के लिए शांत हो गई। बता दें सलाउद्दीन आकाशवाणी के समाचार बुलेटिन में अक्सर अपनी आवाज में न्यूज सुनाया करते थे।
Comments (0)