राज्यसभा में नये आपराधिक संहिता विधेयक पेश करते समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, मोदी सरकार के कार्यकाल में आजादी के बाद से देश में सबसे कम मॉब लिंचिंग की घटनाएं दर्ज की गईं। बता दें कि, गृहमंत्री ने उच्च सदन को सूचित किया कि, भारतीय न्याय संहिता के तहत, जिसका उद्देश्य भारतीय दंड संहिता को प्रतिस्थापित करना है, मॉब लिंचिंग को मृत्युदंड द्वारा दंडनीय अपराध बना दिया गया है।
हत्या से बड़ा कोई अपराध नहीं हो सकता
गृहमंत्री ने कहा आगे कि, हमने भारतीय न्याय संहिता के तहत 21 नए अपराध जोड़े हैं और उनमें से एक मॉब लिंचिंग है। विपक्ष पर गरजते हुए उन्होंने कहा कि, हम पर मॉब लिंचिंग में दोषियों को बचाने का आरोप लगाया गया है। हालाँकि, आपने (विपक्ष) कभी कोई कानून नहीं बनाया है, लेकिन हमने बनाया है। हत्या से बड़ा कोई अपराध नहीं हो सकता और हम इससे सख्ती से निपटेंगे।
नए कानूनों का लक्ष्य आपराधिक न्याय प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन करना है
आपको बता दें कि, भारतीय न्याय संहिता के साथ, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, जो आपराधिक प्रक्रिया संहिता की जगह लेती है, और भारतीय साक्ष्य संहिता, जो भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेती है, को बुधवार को लोकसभा द्वारा और राज्यसभा द्वारा पारित कर दिया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, नए कानूनों का लक्ष्य देश में आपराधिक न्याय प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन करना और "भारतीय सोच पर आधारित न्याय प्रणाली" स्थापित करना है।
नए कानूनों की आत्मा भारतीय है
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अनुसार, मौजूदा आपराधिक कानून "न्याय प्रदान करने के बजाय दंडित करने के इरादे से औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाते हैं। सदन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि, इन कानूनों की आत्मा भारतीय है, और पहली बार, हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली भारत द्वारा, भारत के लिए और भारतीय संसद में बनाए गए कानूनों द्वारा शासित होगी। बीजेपी नेता ने कहा कि, नए आपराधिक कानूनों की आत्मा, शरीर और विचार पूरी तरह से भारतीय हैं और वे आपराधिक न्याय प्रणाली में एक नए युग की शुरुआत करेंगे।
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