कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस (TMC) में ऐतिहासिक टूट के बाद आयोजित इस साल के '21 जुलाई शहीद दिवस' कार्यक्रम की राजनीतिक तपिश बेहद अलग और आक्रामक रही। जिस मंच से कभी टीएमसी विरोधी खेमों और केंद्र सरकार को घेरा जाता था, आज उसी मंच से सबसे तीखे राजनीतिक तीर पार्टी से अलग होकर बने ऋतब्रत बनर्जी के 'ऋत-तृणमूल' शिविर पर चलाए गए।कोलकाता के प्रसिद्ध बिड़ला तारामंडल परिसर में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद पार्टी के सर्वभारतीय साधारण सचिव अभिषेक बनर्जी ने दलतगामियों और राज्य की बीजेपी सरकार व मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर चौतरफा हमला बोला।
"5-10 वाट के बल्ब अब खुद को हैलोजन समझ रहे हैं"
मेयो रोड पर अलग से शहीद दिवस मना रहे बागी ऋतब्रत बनर्जी गुट को बिना नाम लिए सीधे निशाने पर लेते हुए अभिषेक बनर्जी ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, "जो 5 वाट और 10 वाट के छोटे बल्ब हैं, वे आज खुद को हैलोजन समझने की भूल कर रहे हैं! गद्दार उस शिविर में चले गए हैं। उनके बारे में ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं है, बस 'बीसी' (बालिश चाटा/तकिया चाटने वाले) कहना ही काफी है—हालाँकि बीसी के कई मतलब होते हैं "इसके तुरंत बाद अभिषेक ने ममता बनर्जी को पार्टी का एकमात्र पावरहाउस करार दिया। उन्होंने कहा, "पार्टी में ऊर्जा और शक्ति का असली स्रोत केवल ममता बनर्जी हैं। जहाँ ममता बनर्जी हैं, बंगाल की जनता का पूरा समर्थन भी वहीं है। ममता बनर्जी ही तृणमूल की जड़ें हैं।"

"फुटपाथ पर रहकर लड़ेंगे, पर बीजेपी के आगे सिर नहीं झुकाएंगे"
बीजेपी और राज्य प्रशासन पर हमला बोलते हुए अभिषेक ने कहा कि तमाम सरकारी शक्तियों और पुलिस के इस्तेमाल के बावजूद बीजेपी जनसमर्थन हासिल नहीं कर सकी है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा, "बीजेपी के पास केंद्र की सत्ता है, पुलिस है, ताकत है, लेकिन बंगाल की जनता का प्यार नहीं है। हम राजनीतिक लड़ाई से कभी पीछे नहीं हटेंगे। फुटपाथ पर रहेंगे, संघर्ष करेंगे और बीजेपी को हराएंगे। मेरी रीढ़ की हड्डी बिकने के लिए नहीं बनी है। बीजेपी जेल में डाले या फर्जी मामलों में फंसाए, हम सिर नहीं झुकाएंगे।"
"आज नई तृणमूल का जन्म हुआ, जो अगले 40 साल तक लड़ेगी"
सभा में जुटी भारी भीड़ और समर्थकों के जज्बे को नमन करते हुए अभिषेक बनर्जी भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा, "आज जो लोग सभी धमकियों और बाधाओं को दरकिनार कर इस सभा में पहुंचे हैं, उनके सीने में असली दम है। वे अपनी जान हथेली पर रखकर यहाँ आए हैं। आज मुझे महसूस हो रहा है कि तृणमूल कांग्रेस का फिर से नया जन्म हुआ है। यह 'नई तृणमूल' अगले 40 वर्षों तक बंगाल की राजनीति में पूरे दमखम के साथ संघर्ष जारी रखेगी।"