नई दिल्ली. पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड मजहर जमील ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में होने वाले किसी भी हमले या अस्थिरता के लिए डोभाल को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है। जमील ने दावा किया कि भारत अपनी नीति के एक हथियार के रूप में आतंकवाद का निर्यात कर रहा है। उनके अनुसार डोभाल सिद्धांत के माध्यम से भारत पाकिस्तान के अंदर अशांति भड़काने का कार्य कर रहा है। यह बयान लंदन में दिए गए एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर आया जहां उन्होंने भारत की सुरक्षा नीतियों पर तीखा हमला बोला। पाकिस्तानी अधिकारियों और नेताओं के बीच डोभाल के नाम का खौफ लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है।
डोभाल सिद्धांत को लेकर गंभीर आरोप
मजहर जमील ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत डोभाल सिद्धांत को लागू कर पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा कर रहा है। उन्होंने टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जैसे संगठनों का समर्थन करने का आरोप भारत पर लगाया। जमील के अनुसार यह नीति पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आतंकवाद को अपनी रणनीतिक नीति का हिस्सा बना चुका है। इस आरोप के साथ उन्होंने भारत की सुरक्षा रणनीति को क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया। पाकिस्तानी पक्ष लंबे समय से ऐसे आरोप लगाता रहा है लेकिन इस बार परमाणु सलाहकार स्तर से यह बयान आने से इसकी गंभीरता बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच तनाव के मौजूदा माहौल में यह बयान और अधिक चर्चा का विषय बन गया है।
ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देकर आरोप
तेरह अक्टूबर को लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज में बोलते हुए जमील ने ऐतिहासिक उदाहरणों का सहारा लिया। उन्होंने एक हजार नौ सौ इकहत्तर में मुक्ति वाहिनी को भारत द्वारा दिए गए समर्थन का जिक्र किया। इसी तरह उन्होंने एक हजार नौ सौ अस्सी के दशक में एलटीटीई को कथित समर्थन का भी उल्लेख किया। जमील ने अफगानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल के दौरान अफगान-पाकिस्तान सीमा पर भारत द्वारा छह वाणिज्य दूतावास चलाने का हवाला दिया। उनके अनुसार ये सब भारत की हस्तक्षेपवादी नीति के प्रमाण हैं। उन्होंने इन घटनाओं को वर्तमान आरोपों से जोड़कर भारत की मंशा पर सवाल उठाए। इस तरह के ऐतिहासिक संदर्भों से उन्होंने अपने आरोपों को मजबूती देने का प्रयास किया।
ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भ्रामक दावे
जमील ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत द्वारा दोहरे उपयोग वाली ब्रह्मोस मिसाइलों के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ये मिसाइलें परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के वारहेड ले जा सकती हैं। यह दावा पूरी तरह से गलत है क्योंकि ब्रह्मोस मिसाइलें केवल पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम हैं। ये मिसाइलें भारत की स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड का हिस्सा भी नहीं हैं। पाकिस्तानी सलाहकार के इस बयान को विशेषज्ञों ने जानबूझकर फैलाया गया भ्रम बताया है। भारत की मिसाइल क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश के रूप में इसे देखा जा रहा है। ऐसे दावों से क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल और अधिक तनावपूर्ण बनने का खतरा पैदा होता है।
ऑपरेशन सिंदूर और परमाणु तबाही का दावा
जमील ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने दक्षिण एशिया को परमाणु तबाही के कगार पर पहुंचा दिया था। उन्होंने दावा किया कि स्थिति केवल पाकिस्तान के रणनीतिक संयम की वजह से संभल पाई। उनके अनुसार भारत की कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को गंभीर संकट में डाल दिया था। इस बयान के माध्यम से उन्होंने पाकिस्तान को जिम्मेदार और संयमी देश के रूप में पेश करने की कोशिश की। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आरोप तथ्यों से परे हैं और केवल प्रचार का हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच किसी भी सैन्य तनाव को परमाणु स्तर तक ले जाने का आरोप गंभीर प्रकृति का है।
परमाणु क्षमता बढ़ाने को लेकर नई आशंकाएं
जमील ने स्वीडिश थिंक टैंक सिप्री के आकलन का हवाला देते हुए कहा कि भारत परमाणु पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली मिसाइलों को तैनात कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत पहले हमला करने की क्षमता की ओर बढ़ रहा है। जमील के अनुसार भारत ने अब अपने कुछ परमाणु वारहेड को पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ जोड़ दिया है। इस तरह के आरोपों से पाकिस्तान अपनी परमाणु नीति को जायज ठहराने की कोशिश करता दिख रहा है। भारत की समुद्री परमाणु क्षमता को लेकर पाकिस्तानी पक्ष लंबे समय से चिंतित रहा है। इन बयानों से साफ है कि अजीत डोभाल की सुरक्षा रणनीति पाकिस्तान के सामरिक हलकों में गहरी बेचैनी पैदा कर रही है।