हावड़ा/आमता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पूर्ववर्ती सत्तारूढ़ दल के नेताओं के खिलाफ जनता का गुस्सा जगह-जगह फूट रहा है। ताजा मामला आमता (Amta) इलाके से सामने आया है, जहां भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोपों से नाराज ग्रामीणों ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पंचायत प्रधान के घर को घेरकर भारी तांडव मचाया। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर पंचायत प्रधान और उनके पति ने सालों तक गरीब जनता के पैसे हड़पे हैं।
रविवार सुबह-सुबह हुए इस हमले के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया है। नाराज ग्रामीणों का कहना है कि राज्य में नई सरकार के आते ही अब वे अपने साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ खुलकर सामने आ रहे हैं।
ईंट-पत्थर चले, एसी और सिसिटीवी तोड़े
यह पूरी घटना आमता के काशीमुली ग्राम पंचायत की है। रविवार सुबह अचानक सैकड़ों ग्रामीणों ने काशीमुली पंचायत की टीएमसी प्रधान अंजलि दलुई के घर को चारों तरफ से घेर लिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। उग्र भीड़ ने प्रधान के घर पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे खिड़कियों के कांच चकनाचूर हो गए। यही नहीं, ग्रामीणों ने घर के बाहर लगे एयर कंडीशनर (AC) और सीसीटीवी (CCTV) कैमरों को भी ठोक-ठोक कर पूरी तरह से तोड़ डाला।
लूट और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत प्रधान अंजलि दलुई और उनके पति पर पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली करने के कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
आवास योजना में धांधली: ग्रामीणों का आरोप है कि 'आवास योजना' के तहत पक्का घर दिलाने के नाम पर प्रधान और उनके पति ने मोटी रकम वसूली, लेकिन कई लोगों को घर नहीं मिला।
जॉब कार्ड के नाम पर वसूली: आरोप है कि प्रत्येक व्यक्ति से ₹500 लेने के बावजूद उनके मनरेगा जॉब कार्ड रोक कर रखे गए।
100 दिन के काम में रिश्वत: 100 दिन की रोजगार गारंटी योजना के तहत काम देने के बदले भी ग्रामीणों से कमीशन या रिश्वत मांगी जाती थी।
एक पीड़ित ग्रामीण का बयान: "पंचायत प्रधान के पति ने हमसे लंबे समय से जॉब कार्ड देने के नाम पर पैसे ले रखे हैं। पैसे देने के बाद भी आज तक हममें से किसी को जॉब कार्ड नहीं मिला। हम कब तक यह अन्याय सहते?"
मौके पर पहुंची पुलिस, आरोपी परिवार खामोश
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले वे डर के मारे कुछ नहीं बोल पाते थे, लेकिन राज्य के बदलते राजनीतिक हालातों के बीच उनका सब्र का बांध टूट गया। घटना की सूचना मिलते ही जयपुर थाने की पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने सूझबूझ से काम लेते हुए ग्रामीणों को वहां से हटाया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
इस पूरे बवाल और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर फिलहाल आरोपी पंचायत प्रधान अंजलि दलुई या उनके परिवार के किसी सदस्य की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।