बेगूसराय: बेगूसराय के बरौनी थाना क्षेत्र के पपरौर गांव निवासी और पूर्व सेना कर्मी रितेश कुमार का नाम पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी के मामले में सामने आने के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई है। असम पुलिस ने रितेश को गुवाहाटी के सतगांव इलाके में स्थित उसके किराए के मकान से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि रितेश वर्ष 2006 में भारतीय सेना में भर्ती हुआ था और करीब 17 वर्षों तक सेवा देने के बाद वर्ष 2023 में सेवानिवृत्त हुआ। सेना से रिटायरमेंट के बाद वह अपने परिवार के साथ गुवाहाटी में रह रहा था। जानकारी के मुताबिक, रितेश ने अपने परिवार को बताया था कि वह असम सचिवालय में नौकरी कर रहा है। अब पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी के मामले में उसका नाम सामने आने के बाद असम पुलिस के साथ-साथ बेगूसराय पुलिस भी सक्रिय हो गई है। स्थानीय पुलिस उसके पैतृक गांव पपरौर में उसके परिवार, पहचान, पुराने संपर्कों और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रितेश के सेना से रिटायर होने के बाद उसके संपर्क किन लोगों से रहे और वह गुवाहाटी में किस तरह की गतिविधियों में शामिल था। हालांकि, रितेश की कथित भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है और आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
पूर्व सेना कर्मी रितेश कुमार गिरफ्तार
असम पुलिस के अनुसार, रितेश कुमार को गुवाहाटी के सतगांव इलाके में उसके किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया है। रितेश बेगूसराय के बरौनी थाना क्षेत्र के पपरौर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। उसने वर्ष 2006 में भारतीय सेना में भर्ती होकर करीब 17 साल तक सेवा की। वर्ष 2023 में सेना से रिटायर होने के बाद वह गुवाहाटी में रह रहा था। रितेश ने अपने परिवार को बताया था कि वह असम सचिवालय में नौकरी कर रहा है। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गुवाहाटी में रह रहा था। करीब तीन महीने पहले वह परिवार के साथ अपने पैतृक गांव पपरौर भी आया था। अब कथित जासूसी मामले में गिरफ्तारी के बाद उसके बारे में स्थानीय स्तर पर भी जांच शुरू हो गई है।
मोतिहारी के अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद सामने आया नाम
रितेश कुमार का नाम मोतिहारी निवासी 31 वर्षीय अभिषेक कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद सामने आया। असम पुलिस ने अभिषेक को पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि वह गुवाहाटी में रहकर भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील और खुफिया जानकारी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचा रहा था। उसके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पाकिस्तान से जुड़े दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामान बरामद किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, एनआईए से मिले इनपुट के आधार पर मामले की जांच शुरू हुई थी। भारतीय सेना की गजराज कोर और असम पुलिस संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी। अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने जांच आगे बढ़ाई, जिसके दौरान रितेश कुमार तक पुलिस पहुंची।
PIO के निर्देश पर काम करने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, रितेश कुमार पर पाकिस्तान के एक इंटेलिजेंस ऑपरेटिव यानी PIO के निर्देश पर काम करने का आरोप है। पुलिस का यह भी दावा है कि रितेश ने कथित तौर पर अभिषेक कुमार सिंह की मदद की थी। हालांकि, रितेश की भूमिका को लेकर सामने आए आरोपों की विस्तृत जांच अभी जारी है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि रितेश कथित तौर पर किस तरह की गतिविधियों में शामिल था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सेना में सेवा के दौरान उसके पास किस तरह की जानकारी और संपर्क थे। पुलिस उसके पुराने संपर्कों और रिटायरमेंट के बाद की गतिविधियों की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित नेटवर्क में उसकी वास्तविक भूमिका को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी।
दोनों के बीच संपर्क कैसे हुआ, जांच जारी
जांच एजेंसियां अब रितेश कुमार और अभिषेक कुमार सिंह के बीच संपर्क को लेकर भी जानकारी जुटा रही हैं। दोनों की पहचान कब हुई और उनके बीच संपर्क का माध्यम क्या था, इसकी जांच की जा रही है। एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों के बीच किस तरह की सूचनाओं का कथित तौर पर आदान-प्रदान होता था। इस मामले में किसी बड़े नेटवर्क की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। अभिषेक के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी है। इन उपकरणों से उसके संपर्कों और कथित गतिविधियों से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति शामिल है या नहीं।
बेगूसराय पुलिस भी जुटा रही जानकारी
रितेश कुमार का नाम सामने आने के बाद बेगूसराय पुलिस भी मामले को लेकर सक्रिय हो गई है। स्थानीय पुलिस उसके पपरौर स्थित पते का सत्यापन करा रही है। इसके अलावा उसके परिवार, गांव में संपर्क और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रितेश के गांव आने-जाने और स्थानीय लोगों से उसके संपर्क किस तरह के थे। उसके सेना से रिटायर होने के बाद की गतिविधियों की जानकारी भी जुटाई जा सकती है। हालांकि, अभी तक स्थानीय पुलिस की ओर से उसकी भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
जांच पूरी होने के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल यह मामला असम पुलिस और जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में है। रितेश कुमार पर लगे आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। एजेंसियां कथित संपर्कों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य सबूतों की जांच कर रही हैं। साथ ही अभिषेक और रितेश के बीच कथित संबंधों को भी खंगाला जा रहा है। मामले में किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका सामने आती है या नहीं, इस पर भी जांच जारी है। बेगूसराय पुलिस स्थानीय स्तर पर रितेश की पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। ऐसे में जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।