रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर OBC राजनीति उबाल पर है। प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव तेज होता नजर आ रहा है। दोनों ही पार्टियां OBC वर्ग के हितों को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं।
राहुल गांधी की अगुवाई में बड़ी बैठक
24 अप्रैल को दिल्ली में कांग्रेस की OBC एडवाइजरी कमेटी की अहम बैठक हुई। इस बैठक में राहुल गांधी ने OBC से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। जातिगत जनगणना और हिस्सेदारी जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए कांग्रेस ने सरकार पर OBC के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस का आरोप—OBC को नहीं मिल रहा हक
बैठक में शामिल छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेता देवेंद्र यादव ने कहा कि OBC समाज को उसका अधिकार नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस देशभर में OBC के हक की लड़ाई को और मजबूत करेगी और इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
बीजेपी का पलटवार—कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप
वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के रुख पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस ने वर्षों तक OBC समाज का केवल राजनीतिक इस्तेमाल किया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि काका कालेलकर आयोग की रिपोर्ट को कांग्रेस ने लंबे समय तक दबाए रखा और अब सत्ता से बाहर होने के बाद OBC की चिंता जता रही है।
वोट बैंक या हक की लड़ाई?
OBC मुद्दे को लेकर सियासत के इस घमासान के बीच बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में सामाजिक न्याय की लड़ाई है या फिर चुनावी रणनीति का हिस्सा। पांच राज्यों में चुनाव के बीच इस मुद्दे को लेकर बढ़ी सक्रियता ने राजनीतिक मंशाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या मिलेगा OBC वर्ग को वास्तविक फायदा?
हालांकि दोनों ही दल OBC हितों की बात कर रहे हैं, लेकिन अब देखना होगा कि यह बहस केवल बयानबाजी तक सीमित रहती है या इससे OBC वर्ग को कोई ठोस लाभ भी मिलता है। फिलहाल, यह मुद्दा राजनीतिक अखाड़े में बदलता नजर आ रहा है।