नई दिल्ली. महंगाई का असर अब आम लोगों की रसोई के बजट पर साफ दिखाई देने लगा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रोटी राइस रेट रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़ गई। वहीं मांसाहारी थाली भी 6 फीसदी महंगी हुई है। सब्जियों खाद्य तेल चावल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का खर्च बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल सितंबर में शाकाहारी थाली तैयार करने की लागत 28.1 रुपये थी जो इस साल बढ़कर 30.8 रुपये हो गई। इसी तरह मांसाहारी थाली की कीमत 56 रुपये से बढ़कर 59.5 रुपये पहुंच गई।
प्याज की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल
रसोई के बजट पर सबसे अधिक असर प्याज की बढ़ती कीमतों का पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में प्याज के दाम सालाना आधार पर 89 फीसदी बढ़कर 53 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 28 रुपये प्रति किलो था। एक महीने में प्याज की कीमतों में 34 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रबी फसल के उत्पादन में गिरावट कम बारिश और खरीफ फसल की बुआई में देरी के कारण बाजार में प्याज की आवक प्रभावित हुई। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ा। आम परिवारों के लिए प्याज जैसी बुनियादी सब्जी महंगी पड़ रही है।
तेल चावल और गैस ने बढ़ाया खर्च
खाद्य तेल की कीमतें सालाना आधार पर 12 फीसदी और घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 10 फीसदी बढ़े। वहीं चावल की कीमतों में 8 फीसदी की तेजी आई। इन बढ़ोतरी ने घरेलू रसोई का खर्च और बढ़ा दिया। मांसाहारी थाली की महंगाई अपेक्षाकृत कम रहने की वजह चिकन की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी है। सितंबर में ब्रॉयलर चिकन के दाम सालाना आधार पर 2 फीसदी बढ़े। अगस्त की तुलना में सितंबर में वेज थाली 4 फीसदी और नॉन-वेज थाली 3 फीसदी महंगी हुई।
त्योहारों में राहत की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर के पहले पखवाड़े में प्याज की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। हालांकि महीने के अंत तक खरीफ की नई फसल की आवक बढ़ने पर कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है। तब तक आम लोगों को महंगी रसोई का सामना करना पड़ सकता है। सब्जियों और जरूरी वस्तुओं की महंगाई ने मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के बजट को प्रभावित किया है।
आम परिवारों पर दबाव
क्रिसिल की यह रिपोर्ट रसोई की वास्तविक लागत को दर्शाती है। थाली की बढ़ती कीमतें रोजमर्रा के खर्च में इजाफा कर रही हैं। खाद्य तेल एलपीजी और चावल जैसी बुनियादी वस्तुओं की महंगाई ने समग्र लागत बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई फसल आने तक दबाव बना रह सकता है। सरकार और बाजार दोनों को आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि आम आदमी की रसोई पर महंगाई का बोझ कम हो।