Sawan 2023: कैलाश पर्वत, भगवान शिव का वह निवास है जहां भोलेनाथ हमेशा रहते हैं। 4 जुलाई से शुरू होने वाले सावन के पवित्र महीने से पहले, भगवान शिव के भक्तों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है, खबर है कि अब भोलेनाथ के निवास यानि कैलाश पर्वत के दर्शनों के लिए चीन नहीं जाना होगा और कैलाश के दर्शन भारत से ही किए जा सकेंगे।
उत्तराखंड के इस इलाके से दर्शन संभव
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की लिपुलेख पहाड़ियों (Sawan 2023) से कैलाश पर्वत साफ दिखाई दे रहा है। लिपुलेख पहाड़ियों की ऊंचाई करीब 18 हजार फीट ऊंची है। इस नए रास्ते की खोज यहां के रहने वाले गांव वालो ने ही की है। गांव वालों द्वारा मिली जानकारी पर पहुंची विशेषज्ञों की टीम ने रोड मैप, लोगों के रुकने की व्यवस्था, दर्शन के पॉइंट तक जाने का रास्ता समेत कई चीजों पर सर्वे किया। जल्द ही रिर्पोट मंत्रालय को सौंपी जाएगी, उसके बाद नए दर्शन पॉइंट पर काम चालू हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि लिपुलेख की जिस पहाड़ी से कैलाश पर्वत दिखता है वो नाभीढांग से ठीक 2 किलोमीटर ऊपर है।
कैसे कर सकेंगे कैलाश पर्वत के दर्शन ?
विशेषज्ञों ने बताया कि यहां से 4-5 दिन की यात्रा करके कैलाश पर्वत (Sawan 2023) के दर्शन किए जा सकते हैं। श्रध्दालुओं को सड़क मार्ग से धारचूला और बूढ़ी के रास्ते नाभीढंग तक पहुंचना होगा। इसके बाद 2 किमी की चढ़ाई को पैदल चढ़कर कैलाश पर्वत के दर्शन किए जा सकेंगे। पर्यटन विभाग का मानना है कि 2 किमी की खड़ी चढ़ाई को पार करना आसान नहीं है पर यहां तक रास्ता बनाया जा सकता है।
कैलाश के दर्शन के लिए अब चीन की जरुरत नहीं!
कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शनों (Sawan 2023) के लिए अब तक भारत चीन पर निर्भर था पर अब ये निर्भरता खत्म हो सकती है। अब कैलाश पर्वत के दर्शन भारत से ही किए जा सकेंगे। करीब 22 हजार फीट ऊंचा कैलाश पर्वत चीन में मौजूद है। 1962 में भारत और चाइना के बीच हुए युध्द में चीन ने कैलाश पर्वत और मानसरोवर पर कब्जा कर लिया था। तब से यहां पहुंचने के लिए चीन का वीजा लेना पड़ता है।
कैलाश पर्वत की मान्यताएं
माना जाता है कि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव निवास करते हैं। और इस पर्वत की चोटी पर पहुंचना असंभव है। जो भी ऊपर चढ़ने की कोशिश करता है वो नीचे नहीं आ सकता। कैलाश पर्वत पर चढ़ने के बाद शरीर पर बाल और नाखुन काफी तेज से बढ़ने लगते हैं, और बुढ़ापा काफी जल्दी आ जाता है। ये भी माना जाता है कि इस पर्वत पर रेडियोएक्टिविटी काफी ज़्यादा है। शास्त्रों में लिखा है कि कैलाश पर्वत धरती का सेंटर पॉइंट है।
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