धनबाद: धनबाद में चीनी की जमाखोरी और अनावश्यक भंडारण पर अब प्रशासन की निगरानी बढ़ने जा रही है। केंद्र सरकार के नए प्रावधानों के तहत बड़े चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी गई है। जिन संस्थानों की औसत मासिक चीनी खपत 10 टन या उससे अधिक है, वे अब अपनी 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने इस आदेश को राज्य में सख्ती से लागू कराने के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी किया है। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और बाजार में अनावश्यक स्टॉक के जरिए कीमतों को प्रभावित करने की संभावनाओं पर रोक लगाना है।

जिले में बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक की होगी मॉनिटरिंग
नए प्रावधान के बाद धनबाद जिले में चीनी के बड़े खरीदारों और उपभोक्ताओं के स्टॉक पर प्रशासन की विशेष नजर रहेगी। तय सीमा से अधिक चीनी का भंडारण पाए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। निगरानी के दायरे में मिठाई और कन्फेक्शनरी बनाने वाले प्रतिष्ठान भी आएंगे। इसके अलावा शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, बड़े मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदारों के स्टॉक की भी जांच की जा सकती है। प्रशासन जरूरत के अनुसार खरीद, खपत और उपलब्ध स्टॉक का मिलान करेगा। इस दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित मामले की जांच की जाएगी। सरकार का फोकस खास तौर पर बड़े पैमाने पर चीनी रखने वाले उपभोक्ताओं पर रहेगा।
1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा आदेश
चीनी के बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा से जुड़े नए प्रावधान 1 सितंबर से लागू होंगे। यह व्यवस्था 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। यानी करीब तीन महीने तक बड़े संस्थागत खरीदारों के चीनी भंडारण पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। यह अवधि त्योहारों के मौसम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान मिठाई, पेय पदार्थ और खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। मांग बढ़ने के साथ चीनी की खरीद और भंडारण भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो सकता है। ऐसे में सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं के पास जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा होने से रोकने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
17 से 19 अगस्त की चीनी बिक्री का मांगा गया रिकॉर्ड
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों से 17 से 19 अगस्त 2026 के बीच हुई चीनी बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें मिलवार और खरीदारवार बिक्री की जानकारी शामिल होगी। इस रिकॉर्ड के आधार पर बड़े खरीदारों द्वारा खरीदी गई चीनी की मात्रा का आकलन किया जा सकेगा। प्रशासन बिक्री के आंकड़ों और उपलब्ध अभिलेखों के जरिए यह पता लगा सकेगा कि किसी संस्थान की वास्तविक खपत कितनी है। बड़े उपभोक्ताओं की खपत निर्धारित करने में जीएसटी रिटर्न में दर्ज चीनी खरीद और उससे संबंधित विवरणों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे स्टॉक सीमा तय करने और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। जरूरत पड़ने पर खरीद और स्टॉक में अंतर की भी जांच की जा सकती है।
धनबाद में प्रशासन करेगा सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार ने धनबाद समेत सभी जिलों के उपायुक्तों को आदेश का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया है। जिलों में बड़े चीनी खरीदारों और उपभोक्ताओं के स्टॉक की जांच की जा सकती है। प्रशासन यह देखेगा कि संबंधित संस्थान ने निर्धारित सीमा से अधिक चीनी तो जमा नहीं कर रखी है। इसके साथ ही खरीद के आंकड़े, वास्तविक खपत और उपलब्ध स्टॉक के बीच अंतर की भी पड़ताल की जाएगी। यदि रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया जाता है, तो संबंधित मामले की जांच की जाएगी। नियमों का उल्लंघन साबित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। की गई कार्रवाई की जानकारी संबंधित विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का बड़ा फैसला
चीनी के स्टॉक पर नियंत्रण का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब खुदरा बाजार में इसकी कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार 18 अगस्त 2026 को खुदरा चीनी की कीमत करीब 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम थी। एक साल पहले इसी अवधि में चीनी की कीमत करीब 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई थी। इस तरह सालाना आधार पर कीमत में करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कीमतों पर दबाव और बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में सरकार बड़े उपभोक्ताओं के पास अत्यधिक स्टॉक जमा होने से रोकना चाहती है। नए प्रावधानों के जरिए बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर निगरानी बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।