बेंगलुरु:कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने बुधवार को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। बेंगलुरु स्थित लोक भवन में आयोजित भव्य समारोह में उन्होंने हाथ में संविधान की प्रति लेकर पद और गोपनीयता की शपथ ली। उनके साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी. परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। राज्यपाल ने दोनों नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में कांग्रेस के कई शीर्ष नेता, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।
संविधान के साथ शपथ लेकर दिया विशेष संदेश
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान डीके शिवकुमार का हाथ में संविधान लेकर शपथ लेना चर्चा का विषय बना रहा। राजनीतिक जानकार इसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक मान रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व ने भी इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से जोड़ा है। समारोह के दौरान समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
जी. परमेश्वर को मिली उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी
कांग्रेस के वरिष्ठ दलित नेता जी. परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले परमेश्वर को सरकार में अहम भूमिका दी गई है। माना जा रहा है कि उनके अनुभव का लाभ सरकार और संगठन दोनों को मिलेगा। कांग्रेस नेतृत्व ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
12 मंत्रियों ने भी ली शपथ
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के अलावा मंत्रिपरिषद के विस्तार के तहत 12 अन्य नेताओं को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इनमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ और युवा चेहरों को शामिल किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया भी पहली बार मंत्री बने हैं। इसके अलावा केएच मुनियप्पा, के.जे. जॉर्ज, एम.बी. पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायरे गौड़ा, प्रियांक खरगे, यू.टी. खादर, ईश्वर खंड्रे, बिरथी सुरेश और डॉ. शरण प्रकाश पाटिल ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की।
सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद बदली सत्ता की कमान
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 28 मई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वह 20 मई 2023 से 28 मई 2026 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंपने का फैसला किया। लंबे समय से संगठन और सरकार में सक्रिय भूमिका निभाने वाले शिवकुमार को अब राज्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ था डीके शिवकुमार का सफर
डीके शिवकुमार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1980 के दशक में छात्र राजनीति से की थी। 1979 में कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने संगठन में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1985 में उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव साठनूर सीट से लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1989 में मात्र 27 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया। तब से लेकर अब तक वे कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और कर्नाटक की राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं।
कांग्रेस ने साधा संगठन और सत्ता का संतुलन
नई सरकार के गठन के साथ कांग्रेस ने संगठन और सत्ता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह टीम कर्नाटक की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।