नई दिल्ली: भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए E-85 फ्यूल को आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में इंडियन ऑयल के एक पेट्रोल पंप से इसकी शुरुआत की। सरकार का दावा है कि यह ईंधन पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में करीब 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता होगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ-साथ देश का आयात बिल भी कम होगा।
48 पेट्रोल पंपों से हुई शुरुआत, 2027 तक 5,000 आउटलेट का लक्ष्य
सरकार ने फिलहाल देशभर के 48 पेट्रोल पंपों पर E-85 फ्यूल उपलब्ध कराया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि दिसंबर 2026 तक इसे 500 आउटलेट और दिसंबर 2027 तक करीब 5,000 पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने की योजना है। सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे फ्लेक्स फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस ईंधन की मांग भी तेजी से बढ़ेगी और देश को आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
क्या है E-85 फ्यूल और किन वाहनों में होगा इस्तेमाल?
E-85 एक विशेष प्रकार का ईंधन है जिसमें 80 से 85 प्रतिशत एथनॉल और 14 से 19 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इसका उपयोग केवल फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाले वाहनों में किया जा सकता है, जो E-20 से लेकर E-100 तक के एथनॉल मिश्रण पर चलने में सक्षम होते हैं। सामान्य पेट्रोल वाहनों में इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सरकार फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए वाहन निर्माताओं के साथ भी लगातार काम कर रही है।
ग्राहकों को सस्ता ईंधन, किसानों को होगा बड़ा फायदा
सरकार का कहना है कि E-85 की कीमत पेट्रोल से लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी गई है ताकि घरेलू स्तर पर उत्पादित एथनॉल का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच सके। हरदीप सिंह पुरी के अनुसार यदि देश में बिकने वाले नए दोपहिया और यात्री वाहनों में से आधे भी फ्लेक्स फ्यूल तकनीक अपना लेते हैं तो एथनॉल की मांग में 312 करोड़ लीटर से अधिक की वृद्धि हो सकती है। इससे किसानों को सालाना करीब 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय मिलने का अनुमान है।
विदेशी मुद्रा की बचत और प्रदूषण में कमी का दावा
सरकार के मुताबिक E-85 फ्यूल के व्यापक उपयोग से हर वर्ष करीब 15,151 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकेगी। साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 66.4 लाख मीट्रिक टन की कमी आने का अनुमान है। इससे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक देश में कुल एथनॉल मिश्रण स्तर को लगभग 26 प्रतिशत तक पहुंचाना है।
ब्राजील मॉडल पर बढ़ रहा भारत
एथनॉल आधारित ईंधन के उपयोग में ब्राजील दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है, जहां 80 प्रतिशत से अधिक हल्के वाहन फ्लेक्स फ्यूल तकनीक पर चलते हैं। भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है ताकि ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो, किसानों की आय बढ़े और प्रदूषण कम किया जा सके।