भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार सिविल सेवा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी किए गए नए मसौदे में सरकारी नौकरी की पात्रता, परिवीक्षा अवधि, स्थायीकरण और वरिष्ठता से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा।
दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार होंगे अपात्र
मसौदा नियमों में स्पष्ट किया गया है कि जिन उम्मीदवारों की दो से अधिक जीवित संतान हैं और जिनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, वे किसी भी शासकीय सेवा या पद पर नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा यदि किसी उम्मीदवार की पहले से एक संतान है और 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुए एक ही प्रसव में दो या उससे अधिक बच्चों का जन्म होता है, तो ऐसी स्थिति में उसे इस नियम से छूट मिलेगी। यह प्रावधान पूर्व से लागू नियमों को नए सिविल सेवा नियमों में शामिल करने के लिए प्रस्तावित किया गया है।
प्रोबेशन पूरा होते ही स्वतः स्थायी होंगे कर्मचारी
नए मसौदे में कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत का भी प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार यदि परिवीक्षा अवधि समाप्त होने के छह महीने के भीतर विभाग कोई निर्णय नहीं लेता है, तो संबंधित कर्मचारी को स्वतः स्थायी माना जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य वर्षों तक लंबित रहने वाले स्थायीकरण के मामलों को खत्म करना और कर्मचारियों को समय पर सेवा सुरक्षा प्रदान करना है।
24 साल पुराना नियम फिर चर्चा में
दो बच्चों से जुड़ा यह प्रावधान कोई नया नहीं है। वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सरकार ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 में संशोधन कर यह प्रतिबंध लागू किया था। हालांकि पिछले वर्ष इस शर्त को हटाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था और उसे मुख्यमंत्री स्तर पर सैद्धांतिक सहमति मिलने की चर्चा रही थी, लेकिन नए मसौदे में यह प्रावधान फिर शामिल किया गया है।
15 जून तक मांगे गए सुझाव
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 2026’ का प्रारूप जारी किया है। सरकार ने कर्मचारी संगठनों, अधिकारियों और आम नागरिकों से 15 जून तक सुझाव मांगे हैं। सुझावों के आधार पर अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ये नियम जुलाई 2026 से लागू किए जा सकते हैं।
सेवा शर्तों में एकरूपता लाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि नए नियम लागू होने के बाद भर्ती, परिवीक्षा, वरिष्ठता और स्थायीकरण से जुड़े विवाद कम होंगे। इससे विभिन्न विभागों में सेवा शर्तों में समानता आएगी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी बनेंगी। यह प्रस्तावित नियम राज्य की अधिकांश शासकीय सेवाओं पर लागू होंगे, जबकि विशेष अधिनियमों या संविदा आधारित सेवाओं पर संबंधित अलग प्रावधान लागू रहेंगे।