नई दिल्ली - देश की राजधानी दिल्ली में INDI गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। बैठक में राजनीतिक रणनीति और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, संजय राउत, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जिसमें कई नेता मौजूद रहे।
एकनाथ शिंदे का विपक्ष पर हमला
बैठक के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने INDI गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि गठबंधन के नेताओं में न तो एकता है और न हीगंभीरता दिखाई देती है। शिंदे ने कहा कि, INDI गठबंधन में इतना घमंड है कि वे प्रधानमंत्री मोदी पर अनाप-शनाप आरोप लगाते हैं। उनकी हार हुई है, इसलिए उनका मनोबल टूट चुका है और अब वे फिर से साथ आने की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ दलों की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल
एकनाथ शिंदे ने बैठक में कुछ सहयोगी दलों की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एम. के. स्टालिन की पार्टी डीएमके, आम आदमी पार्टी और TVK जैसे दल बैठक में नजर नहीं आए। उनका कहना था कि कई दलों को कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर संदेह है और वे गठबंधन से दूरी बना रहे हैं। शिंदे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस छोटे दलों को कमजोर कर खुद मुख्य विपक्षी दल बनने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
INDI गठबंधन की बैठक के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं भाजपा और NDA के नेता गठबंधन की एकजुटता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस बैठक के राजनीतिक प्रभाव और विपक्ष की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।