नई दिल्ली: दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिक अल नीनो की संभावित वापसी को लेकर सतर्क हैं। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव से वैश्विक मौसम प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसका असर केवल समुद्री तूफानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत कई देशों में गर्मी, सूखा, जंगलों में आग और बारिश के पैटर्न पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि अल नीनो सक्रिय होता है तो भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है और तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।
क्या है अल नीनो और क्यों माना जाता है खतरनाक?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित होता है और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है। यह घटना आमतौर पर हर दो से सात साल के बीच होती है और कई महीनों तक प्रभावी रह सकती है। अल नीनो के सक्रिय होने पर कहीं अत्यधिक बारिश होती है तो कहीं सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
तूफानों की दिशा और रफ्तार पर भी पड़ेगा असर
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने अनुमान जताया है कि इस वर्ष अटलांटिक महासागर में तूफानों की गतिविधि सामान्य से कम रह सकती है। इसकी मुख्य वजह अल नीनो को माना जा रहा है। अल नीनो के दौरान तेज हवाओं का पैटर्न बदल जाता है, जिससे अटलांटिक क्षेत्र में बनने वाले तूफानों की संख्या और तीव्रता कम हो सकती है। वहीं दूसरी ओर प्रशांत महासागर में तूफानी गतिविधियां बढ़ने की आशंका रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक मौसम चक्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
भारत पर पड़ सकता है सीधा असर
अल नीनो का सबसे बड़ा प्रभाव भारत के मानसून पर देखने को मिलता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसके कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है और कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। कम बारिश का असर खेती-किसानी पर पड़ सकता है, जिससे फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा लंबे समय तक गर्मी बने रहने और हीटवेव की घटनाओं में वृद्धि होने की संभावना भी जताई जा रही है।
कृषि और महंगाई पर भी बढ़ सकती है चिंता
यदि मानसून कमजोर रहता है तो इसका असर सीधे कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। कम बारिश के कारण जलाशयों और भूजल स्तर पर दबाव बढ़ेगा, जिससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल उत्पादन में गिरावट आने पर खाद्यान्न और सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।
दुनिया के कई हिस्सों में दिख सकता है प्रभाव
अल नीनो का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहता। ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका, अमेजन क्षेत्र और दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा और जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ सकती हैं। वहीं अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां बन सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अल नीनो के प्रभाव पहले की तुलना में और अधिक गंभीर हो सकते हैं।