नई दिल्ली. मई और जून के दौरान देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी भारत के अनेक क्षेत्रों में लोगों को भीषण गर्मी और लू का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ रही हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
एक दिन की गर्मी भी बन सकती है जानलेवा
नई रिसर्च के अनुसार, अत्यधिक गर्मी का केवल एक दिन ही देशभर में लगभग 3,400 अतिरिक्त मौतों का कारण बन सकता है। अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि लगातार पांच दिनों तक भीषण हीटवेव बनी रहती है तो अतिरिक्त मौतों की संख्या 30,000 तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि गर्मी का प्रभाव केवल अस्थायी परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।
आधिकारिक आंकड़ों में नहीं दिखती पूरी तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी से होने वाली अधिकांश मौतें सीधे हीटस्ट्रोक के रूप में दर्ज नहीं होतीं। कई मामलों में मृत्यु का कारण हृदयाघात, श्वसन संबंधी रोग, डिहाइड्रेशन या अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं दर्ज की जाती हैं, जबकि अत्यधिक तापमान इन समस्याओं को गंभीर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि गर्मी से होने वाली वास्तविक मौतों का आंकड़ा अक्सर आधिकारिक रिकॉर्ड में कम दिखाई देता है।
शहरों के साथ गांव भी खतरे में
शोधकर्ताओं ने देश के 10 प्रमुख शहरों से जुड़े अध्ययनों का विश्लेषण कर राष्ट्रीय स्तर पर अनुमान तैयार किया। अध्ययन में पाया गया कि गर्मी का खतरा केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि वहां शीतलन सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवाएं और गर्मी से बचाव के संसाधन अपेक्षाकृत कम उपलब्ध होते हैं। ऐसे में वास्तविक प्रभाव अनुमानित आंकड़ों से भी अधिक हो सकता है।
कई राज्यों में टूट रहे हैं तापमान के रिकॉर्ड
इस वर्ष दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य कई राज्यों में तापमान ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। कई क्षेत्रों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। लगातार चल रही गर्म हवाओं और लू ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। खेतों में काम करने वाले मजदूरों, बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक मानी जा रही है।
रात की गर्मी भी बन रही बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार अब केवल दिन की गर्मी ही नहीं, बल्कि रात का बढ़ता तापमान भी चिंता का विषय है। पहले सूर्यास्त के बाद लोगों को कुछ राहत मिल जाती थी, लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट की इमारतें और सड़कें दिनभर की गर्मी को देर रात तक संचित रखती हैं। इससे शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं। इसे "नाइट टाइम हीट स्ट्रेस" के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में और गंभीर चुनौती बन सकता है।
गर्मी से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती हीटवेव को केवल मौसमी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्याप्त पानी पीना, दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचना, हल्के कपड़े पहनना और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आने वाले वर्षों में हीटवेव से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था, शहरी नियोजन और जनजागरूकता अभियानों को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी।