नई दिल्ली - दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है। पुलिस के अनुसार, Facial Recognition System (FRS) की मदद से पिछले तीन दिनों में 2,500 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान की गई है। पुलिस का कहना है कि 20 जुलाई को हुई हिंसा के बाद प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है। इसी बीच सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के बीच तीसरे दौर की बातचीत भी प्रस्तावित है।
20 जुलाई की हिंसा पर पुलिस का बड़ा दावा
20 जुलाई को दिल्ली में रेल भवन और संसद के आसपास हुए प्रदर्शन को लेकर दर्ज एफआईआर में दिल्ली पुलिस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हत्या की नीयत से हमला किया। इसी आधार पर एफआईआर में हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं।
पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में 129 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि 60 से अधिक प्रदर्शनकारी भी चोटिल हुए। मामले की जांच जारी है और घटना से जुड़े वीडियो, डिजिटल साक्ष्य तथा अन्य सबूतों की जांच की जा रही है।
जंतर-मंतर इलाके में सुरक्षा और निगरानी बढ़ी
हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। सीसीटीवी निगरानी के साथ-साथ Facial Recognition System का भी व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि प्रदर्शन में शामिल संदिग्ध और आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
वीकेंड तक शराब की दुकानें शाम 8 बजे होंगी बंद
प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। जंतर-मंतर क्षेत्र के आसपास वीकेंड तक शराब की सभी दुकानें रात 10 बजे के बजाय शाम 8 बजे बंद कर दी जाएंगी। सरकार के अनुसार यह फैसला दिल्ली पुलिस की सुरक्षा संबंधी सलाह के आधार पर लिया गया है, ताकि भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की बातचीत पर नजर
NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और CJP नेताओं के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता होने वाली है। पिछली बैठकों में छात्रों की मांगों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और अन्य मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन मांगों पर क्या अंतिम फैसला लेती है और क्या इससे जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन का समाधान निकल पाएगा।