नई दिल्ली. फ्लाईदुबई के बोइंग 737 मैक्स विमान को संभालने में अगर 40 सेकंड की और देरी होती तो वह दुर्घटनाग्रस्त हो जाता। इजरायली वायुसेना के अनुभवी लड़ाकू पायलट ने गुरुवार को यह दावा किया। उन्होंने विमान के अचानक आसमान से नीचे आने को भयावह घटना करार दिया। इजरायली वायुसेना में 28 साल तक सेवा दे चुके अलोन पेरेग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर विमान ने 40 सेकंड में अपनी आधी ऊंचाई खो दी तो अगले 40 सेकंड में क्रैश हो जाता। उन्होंने इस घटना को अत्यंत खतरनाक बताया और कहा कि पायलट की सूझबूझ ने ही बड़ी त्रासदी को टाला। अनुभवी पायलट के अनुसार ऐसी स्थितियों में समय का हर पल निर्णायक साबित होता है। उनके शब्दों ने घटना की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया।
विमान की खतरनाक ऊंचाई गिरावट
विमान उस समय खतरनाक स्थिति में पहुंच गया जब वह 34 हजार फीट की ऊंचाई से 60 सेकंड में 17 हजार फीट नीचे आ गया। इस दौरान विमान की रफ्तार भी तेजी से बढ़ी और वह सुपरसोनिक गति के करीब पहुंच गया था। इसके बावजूद विमान का आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। इतनी तेज गिरावट में विमान पर अत्यधिक दबाव पड़ता है जो किसी भी हवाई जहाज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ऊंचाई में इतनी तेजी से कमी आने से यात्रियों और क्रू सदस्यों के लिए भी भयानक स्थिति पैदा हो गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट सामान्य उड़ान की सीमाओं से कहीं अधिक थी। फिर भी विमान नियंत्रित अवस्था में लौट सका।
सुपरसोनिक गति और ढांचे पर दबाव
सुपरसोनिक की रफ्तार यानी 1235 किलोमीटर प्रति घंटा से नीचे आने पर विमान के ऊपर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में विमान का ढांचा टूट सकता था। हालांकि इस घटना में विमान के पीछे लगा रडर टूटकर अलग हो गया था। रडर विमान की दिशा को नियंत्रित करने में मदद करता है लेकिन पायलट की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। अमेरिकी पायलट बज पैटरसन ने कहा कि यह विमान अपनी तय अधिकतम गति से करीब 185 किलोमीटर प्रति घंटे ज्यादा तेज उड़ रहा था। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। इतनी अधिक गति पर संरचनात्मक क्षति का खतरा बेहद अधिक होता है। रडर के टूटने के बावजूद विमान को संभालना आसान नहीं था।
रडर क्षति और नियंत्रण की चुनौती
रडर के अलग हो जाने से विमान की दिशा नियंत्रण प्रणाली प्रभावित हो गई थी। ऐसी स्थिति में पायलट के लिए विमान को स्थिर रखना अत्यंत कठिन कार्य था। फिर भी भारतीय कैप्टन की मौजूदगी और त्वरित निर्णय ने स्थिति को संभाला। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रडर के साथ अन्य प्रमुख हिस्से भी क्षतिग्रस्त हो जाते तो विमान हवा में ही बिखर सकता था। इस घटना ने आधुनिक विमानों की मजबूती और पायलट प्रशिक्षण दोनों की परीक्षा ली। रडर क्षति के बावजूद सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सकी। यह तथ्य घटना की असाधारण प्रकृति को रेखांकित करता है।
स्मित मच्छार का अदम्य साहस
दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में बुधवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार ने जान की बाजी लगाकर अदम्य साहस की जो मिसाल पेश की। कॉकपिट के अंदर हुए जानलेवा हमले में बुरी तरह लहूलुहान होने के बावजूद पायलट का हौसला नहीं टूटा। उन्होंने शरीर से बहते खून और असहनीय दर्द की परवाह किए बिना न सिर्फ कॉकपिट का दरवाजा खोला बल्कि इजरायली यात्रियों के साथ मिलकर 174 जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर निकाल लाए। उनकी सूझबूझ और हिम्मत के बिना विमान की स्थिति और अधिक भयावह हो सकती थी। स्मित के इस कृत्य ने पूरे विश्व में भारतीय पायलट की छवि को गौरवान्वित किया। उनकी बहादुरी ने ही 40 सेकंड की उस नाजुक घड़ी को पार करने में मदद की।