नई दिल्ली: नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर ही सवाल उठने की खबर सामने आई है। विवाद किसी नए मतदाता का नाम जोड़ने की पूरी प्रक्रिया को लेकर नहीं, बल्कि आवेदन के साथ मांगी गई एक अतिरिक्त जानकारी को लेकर है। इस मामले ने निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर भी बहस शुरू कर दी है।
Form 6 क्यों महत्वपूर्ण है?
जब कोई भारतीय नागरिक पहली बार मतदाता बनना चाहता है, तो उसे मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए Form 6 भरना होता है। इस आवेदन में आवेदक की व्यक्तिगत जानकारी, उम्र, पता और अन्य जरूरी विवरण लिए जाते हैं। पात्र नागरिक के नए मतदाता के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया में Form 6 की अहम भूमिका होती है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
मामला तब चर्चा में आया, जब जुलाई 2026 से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया में नए मतदाताओं से Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगी जाने लगी। आवेदक से यह बताने को कहा गया कि क्या उसका नाम, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के बाद तैयार की गई मतदाता सूची में मौजूद था।
यही सवाल विवाद का केंद्र बन गया। सवाल उठाया गया कि नए मतदाता से उसके परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी किस आधार पर मांगी जा रही है और क्या इस तरह की जानकारी लेने के लिए Form 6 में औपचारिक बदलाव जरूरी था।
दो चुनाव आयुक्तों ने क्या आपत्ति जताई?
इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक जोशी ने मई 2026 में ही Form 6 से जुड़ी इस व्यवस्था पर सवाल उठाया था। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस मामले में प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र से जुड़े सवाल उठाए।
यह मुद्दा इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सामने आई व्यापक असहमति का हिस्सा बताई गई हैं।
ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग का क्या कहना है?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले निर्वाचन आयोग ने Form 6 में बदलाव किए जाने की बात को अलग तरीके से स्पष्ट किया है। आयोग के मुताबिक, मूल Form 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। SIR से संबंधित जानकारी के लिए आवेदन के साथ एक अलग अतिरिक्त घोषणा, जिसे Annexure D बताया गया है, जोड़ी गई है।
आयोग का कहना है कि 24 जून 2025 को जारी SIR से संबंधित निर्देशों में नए मतदाताओं के आवेदन के साथ Form 6/Form 8 के अलावा अतिरिक्त घोषणा लेने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। इसलिए आयोग के अनुसार इसे Form 6 में बदलाव के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
SIR से इसका क्या संबंध है?
Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची की विशेष और विस्तृत समीक्षा की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज नामों और संबंधित विवरणों की जांच करना तथा सूची को अपडेट करना है।
यही वजह है कि नए मतदाताओं से उनके माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी लेने की व्यवस्था को SIR से जोड़ा गया है। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि कई जगह पुराने मतदाता रिकॉर्ड काफी पुराने हैं। ऐसे में नए आवेदकों के लिए इन रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी जुटाना कितना व्यावहारिक होगा।
मामला सिर्फ Form 6 तक सीमित नहीं
Form 6 को लेकर सामने आया विवाद निर्वाचन आयोग के भीतर उठी आपत्तियों की व्यापक चर्चा का एक हिस्सा है। रिपोर्टों में चुनावी डेटाबेस तक पहुंच, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा विभिन्न राज्यों में SIR से संबंधित फैसलों को लेकर भी सवालों का उल्लेख किया गया है।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की ओर से इन खबरों पर यह कहा गया है कि SIR समेत आयोग के फैसले चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के साथ लिए गए हैं। यानी एक तरफ कुछ प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियों की बात सामने आई है, जबकि आयोग ने अपने फैसलों में सामूहिक सहमति होने की बात कही है।
नए वोटरों के लिए क्या बदला?
पूरे विवाद को आसान भाषा में समझें तो Form 6 से नए मतदाता के तौर पर नाम दर्ज कराने की मूल प्रक्रिया खत्म या बदल नहीं गई है। विवाद उस अतिरिक्त जानकारी को लेकर है, जो SIR के संदर्भ में नए आवेदकों से मांगी जा रही है।
निर्वाचन आयोग इसे Form 6 में संशोधन के बजाय अलग अतिरिक्त घोषणा बता रहा है। वहीं, दो चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवाल इस व्यवस्था के कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलुओं पर बहस को सामने लाते हैं।
इसलिए Form 6 विवाद को केवल "फॉर्म बदल दिया गया" कहकर समझना पूरी तस्वीर नहीं बताता। असल मुद्दा नए मतदाताओं से SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी लेने की व्यवस्था, उसके आधार और उसे लागू करने की प्रक्रिया को लेकर है।