बेंगलुरु. इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने श्री रामचंद्र उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र के दीक्षांत समारोह के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए बताया कि एचएलवीएम 3 रॉकेट का उपयोग करके गगनयान-1 यानी जी1 का पहला मानव रहित परीक्षण उड़ान दो महीने में श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से आयोजित किया जाएगा। यह उड़ान एक मानव रहित परीक्षण मिशन है जो अर्ध-मानव रोबोट व्योममित्र को पृथ्वी की निचली कक्षा में ले जाएगा। इसमें मानव-रेटेड एचएलवीएम 3 रॉकेट और स्वदेशी रूप से विकसित क्रू मॉड्यूल का उपयोग किया जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी सभी प्रणालियों की वैधता साबित करने के लिए पहली परीक्षण उड़ान से पहले महत्वपूर्ण योग्यता परीक्षण आयोजित करती रही है। यह कदम गगनयान परियोजना को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
व्योममित्र और स्वदेशी क्रू मॉड्यूल की महत्वपूर्ण भूमिका
G1 उड़ान में अर्ध-मानव रोबोट व्योममित्र को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा। इसमें स्वदेशी रूप से विकसित क्रू मॉड्यूल का उपयोग किया जाएगा जो मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसरो ने बताया कि यह परीक्षण उड़ान सभी प्रमुख प्रणालियों की कार्यक्षमता की जांच करने के लिए आवश्यक है। मानव-रेटेड रॉकेट और क्रू मॉड्यूल के सफल परीक्षण के बाद ही आगे के मिशनों की राह खुलेगी। व्योममित्र जैसी प्रणालियों का उपयोग वास्तविक मानव दल भेजने से पहले सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया आत्मनिर्भर अंतरिक्ष कार्यक्रम की मजबूती को दर्शाती है।
महत्वपूर्ण योग्यता परीक्षण पूरे होने की पुष्टि
इसरो ने भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर का उपयोग करके पैराशूट मंदी प्रणालियों का परीक्षण करते हुए दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट पूरा कर लिया है। इसके अलावा क्रू मॉड्यूल-सर्विस मॉड्यूल पृथक्करण परीक्षण, एपेक्स कवर पृथक्करण और क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम का परीक्षण भी पूरा किया जा चुका है। ये सभी परीक्षण गगनयान मिशन की सुरक्षा और सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अंतरिक्ष एजेंसी लगातार विभिन्न प्रणालियों की वैधता साबित करने के लिए ऐसे परीक्षण आयोजित करती रही है। इन सफल परीक्षणों ने मिशन की तैयारियों को और मजबूत बना दिया है। अब पहला मानव रहित उड़ान परीक्षण इन उपलब्धियों पर आधारित होकर आगे बढ़ेगा।
मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन का लक्ष्य और समयसीमा
गगनयान परियोजना के तहत तीन सदस्यीय दल को 3 दिनों के मिशन के लिए 400 किमी की कक्षा में लॉन्च करके और उन्हें भारतीय समुद्री जल में सुरक्षित उतारकर पृथ्वी पर वापस लाना है। इससे भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करेगा। पहले मानव उड़ान मिशन से पहले अतिरिक्त मानव रहित परीक्षण उड़ानें जिनमें ह्यूमनॉइड शामिल होंगे लॉन्च की जाएंगी। पहले मानव उड़ान मिशन की संभावित समयसीमा पर डॉ. नारायणन ने कहा कि इसकी घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा की जाएगी। यह मिशन देश की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित होगा। सभी तैयारियां इसी बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जा रही हैं।
दूसरे अंतरिक्ष केंद्र और लॉन्च पैड का विस्तार
तमिलनाडु के तटीय थूथुकुडी जिले के कुलशेखरपट्टिनम में बन रहे दूसरे अंतरिक्ष केंद्र के बारे में डॉ. नारायणन ने बताया कि वर्ष 2029-30 से प्रति वर्ष 50 रॉकेट यानी प्रति सप्ताह एक रॉकेट लॉन्च करने का लक्ष्य है। इसके लिए अधिक लॉन्च पैड की आवश्यकता है। वर्तमान में श्रीहरिकोटा में दो लॉन्च पैड हैं जहां से पीएसएलवी और जीएसएलवी की लॉन्चिंग हो रही है। अब दो और जोड़े गए हैं जिनमें एक कुलशेखरपट्टिनम में मुख्य रूप से छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों यानी एसएसएलवी के लिए और दूसरा श्रीहरिकोटा में तीसरा लॉन्च पैड है। एक बार ये चारों लॉन्च पैड तैयार हो जाएं तो प्रति वर्ष 50 रॉकेट भेजने की क्षमता हासिल हो जाएगी।
इसरो का निजीकरण नहीं केवल पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
निजीकरण संबंधी अटकलों को खारिज करते हुए डॉ. नारायणन ने स्पष्ट किया कि लॉन्च पैड निजी कंपनियों को सौंपे जाएंगे जो उनका संचालन करेंगी। इसका मतलब यह नहीं है कि इसे बेचा जा रहा है या निजीकरण किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसरो का निजीकरण नहीं होने जा रहा है। यह भारत सरकार का एक विभाग है और इसका निजीकरण नहीं किया जा सकता। इसरो केवल निजी कंपनियों और स्टार्ट-अप्स का मार्गदर्शन कर रहा है ताकि देश में अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का विकास हो सके। इससे पूरे देश में अंतरिक्ष क्षेत्र को नई गति मिलेगी और आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।