नई दिल्ली. देश के विभिन्न हिस्सों में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है और आने वाले घंटों में इसका असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने ताजा पूर्वानुमान में संकेत दिया है कि 14 जून को उत्तर, पूर्व, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में तेज बारिश और तूफानी हवाओं का दौर शुरू हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वायुमंडल में सक्रिय कई मौसमी प्रणालियां एक साथ प्रभावी हो रही हैं, जिसके कारण व्यापक स्तर पर अस्थिर मौसम की स्थिति बन रही है। यही वजह है कि विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाए
मौसम विभाग का अनुमान है कि कई क्षेत्रों में हवाओं की गति 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इतनी तेज रफ्तार की आंधी सामान्य जनजीवन को प्रभावित करने के साथ-साथ पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि खुले स्थानों पर खड़े वाहन, अस्थायी निर्माण और खेतों में लगी फसलें भी इस तेज हवा की चपेट में आ सकती हैं। ऐसे में नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
19 राज्यों में भारी बारिश और तूफान की चेतावनी
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, असम, केरल, तमिलनाडु, त्रिपुरा और मेघालय सहित कुल 19 राज्यों के लिए चेतावनी जारी की है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश, आंधी और कई स्थानों पर अत्यधिक मौसमीय गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। विभाग का मानना है कि कुछ क्षेत्रों में अल्प अवधि के भीतर भारी वर्षा भी दर्ज की जा सकती है, जिससे स्थानीय जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली का भी खतरा
बारिश और तेज हवाओं के अलावा कुछ राज्यों में ओलावृष्टि की संभावना भी व्यक्त की गई है। विशेष रूप से पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम बढ़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार गरज वाले बादलों की तीव्र सक्रियता के कारण बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में कार्य कर रहे लोगों, खुले स्थानों पर मौजूद नागरिकों तथा ऊंचे स्थानों पर रहने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए।
किसानों के लिए बढ़ी चिंता, फसलों को हो सकता है नुकसान
मौसम की इस संभावित मार का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। तेज हवाओं, भारी बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में फसल कटाई या भंडारण का कार्य चल रहा है, वहां किसानों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। खेतों में रखी कृषि उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखने और मौसम की ताजा जानकारी पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है। यह मौसमीय गतिविधि कई इलाकों में किसानों की चिंताओं को बढ़ा सकती है।
पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष निगरानी की जरूरत
हिमालयी क्षेत्रों में भी मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में तेज बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क अवरोध और स्थानीय स्तर पर जलभराव जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। प्रशासन भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
चक्रवाती परिसंचरण बढ़ा रहा मौसम की सक्रियता
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उसके आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडल में एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके अलावा मध्य असम और आसपास के क्षेत्रों में भी एक अन्य चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। यही प्रणालियां वातावरण में नमी और अस्थिरता बढ़ाकर व्यापक वर्षा और आंधी की परिस्थितियां तैयार कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन प्रणालियों की सक्रियता के आधार पर मौसम की स्थिति में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अगले 24 घंटे रहेंगे बेहद अहम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी 24 घंटे देश के कई हिस्सों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। प्रशासनिक एजेंसियों को सतर्क रहने और नागरिकों को मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। यदि अनुमानित मौसमीय गतिविधियां पूरी तीव्रता के साथ सक्रिय होती हैं, तो कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सतर्कता, समय पर सूचना और सावधानी ही संभावित जोखिमों को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम होगी।