नई दिल्ली. भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे उत्तर भारत के लिए आने वाले कुछ दिन राहत लेकर आ सकते हैं। भारतीय मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार अगले छह दिनों के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में मौसम तेजी से करवट लेगा। गरज-चमक, तेज हवाओं और मध्यम से भारी वर्षा की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून की प्रगति के साथ वायुमंडलीय परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं, जिससे वर्षा का दायरा धीरे-धीरे उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों तक फैल सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में उमस से राहत की उम्मीद, मानसून की दस्तक अब करीब
राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से अत्यधिक उमस और गर्म रातों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार एक और दो जुलाई के दौरान दिल्ली-एनसीआर में हल्की से मध्यम वर्षा, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। प्री-मानसून गतिविधियों के कारण तापमान में कुछ गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य समय से कुछ दिन की देरी से पहुंच रहा है, लेकिन वर्तमान मौसमीय परिस्थितियां संकेत दे रही हैं कि राजधानी में मानसून का आगमन अब अधिक दूर नहीं है।
उत्तर प्रदेश के 55 जिलों में अलर्ट, बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी
उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग ने 55 जिलों के लिए विशेष सतर्कता जारी की है। प्रदेश के अनेक हिस्सों में तेज आंधी, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। तराई और पूर्वी क्षेत्रों में पहले ही अच्छी वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मौसम तेजी से बदलने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में व्यापक वर्षा होती है तो खरीफ फसलों की बुवाई को नई गति मिलेगी और किसानों को बड़ी राहत प्राप्त होगी।
राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल में भी बढ़ेगी बारिश की गतिविधि
उत्तर-पश्चिम और पर्वतीय क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय होने की संभावना है। राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी दोनों भागों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक लगातार वर्षा का क्रम बना रह सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक जलस्तर बढ़ने और फिसलन जैसी परिस्थितियों की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बरतने की अपील की है। पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है।
मध्य भारत में भी सक्रिय रहेगा वर्षा का दौर
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी आगामी दिनों में मौसम के अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में तेज हवाओं, गरज-चमक और वर्षा की गतिविधियां दो से चार जुलाई तक जारी रह सकती हैं। कई स्थानों पर बिजली गिरने और तेज हवा चलने की संभावना भी व्यक्त की गई है। छत्तीसगढ़ में भी व्यापक वर्षा से तापमान में गिरावट आने तथा मौसम सुहावना होने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह वर्षा कृषि गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि मानसून की गति पिछले दिनों अपेक्षाकृत धीमी रही थी।
मानसून की रफ्तार बढ़ने से कृषि और जल संसाधनों को मिलेगी राहत
देश के अनेक हिस्सों में मानसून की धीमी प्रगति के कारण अब तक वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई है, जिससे किसानों और जल प्रबंधन से जुड़े विभागों की चिंता बढ़ी हुई थी। हालांकि मौसम विभाग का मानना है कि अगले कुछ दिनों में वर्षा की गतिविधियां तेज होने से मानसून को नई गति मिलेगी। यदि अनुमान के अनुरूप व्यापक वर्षा होती है तो जलाशयों का जलस्तर सुधरेगा, खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आएगी और भीषण गर्मी से राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी सप्ताह उत्तर भारत के मौसम और कृषि दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।