नई दिल्ली. देश के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल भारत की उभरती रक्षा निर्यात कहानी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। उन्होंने बताया कि ब्रह्मोस का कुल निर्यात 600 मिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने वाला है। इस अत्याधुनिक प्रणाली को दक्षिण-पूर्व एशिया के तीन देशों को बेचने के लिए अनुबंध एवं समझौते हो चुके हैं जिनमें फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम शामिल हैं। एक साक्षात्कार में रक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि ब्रह्मोस उन अत्याधुनिक रणनीतिक प्रणालियों में से एक है जिन्हें भारत निर्यात करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस प्रणाली की युद्धक क्षमता भी साबित हुई है। यह उपलब्धि भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है।
हवा से प्रक्षेपित संस्करण की सफलता
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि ब्रह्मोस का हवा से प्रक्षेपित किया जाने वाला संस्करण भी मौजूद है और सुखोई लड़ाकू विमानों पर इसका प्रदर्शन बेहद सफल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रणाली भारतीय वायुसेना की ताकत को और बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हवा से प्रक्षेपित ब्रह्मोस की क्षमता ने इसे और अधिक घातक तथा लचीला बना दिया है। विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर इसकी सफलता ने विदेशी खरीदारों का विश्वास बढ़ाया है। रक्षा सचिव के अनुसार यह निर्यात भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी क्षमता का जीवंत प्रमाण है। सुखोई विमानों पर सफल परीक्षण ने इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत किया है।
मध्य एशिया में आकाश मिसाइल की बढ़ती मांग
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि पश्चिमी एशियाई देश आर्मेनिया के पहला ग्राहक बनने के बाद मध्य एशिया में भारतीय मिसाइल आकाश की मांग भी बढ़ी है। पूरी तरह भारत में विकसित और निर्मित इस छोटी दूरी की घातक मिसाइल प्रणाली का निर्यात ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के लिए शुरू हो गया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा विकसित तथा भारत डायनामिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित आकाश मिसाइल का उत्पादन अब स्थिर हो चुका है। इस मिसाइल की सफलता ने क्षेत्रीय देशों में भारतीय रक्षा उत्पादों के प्रति रुचि बढ़ाई है। मध्य एशियाई देशों के साथ हुए समझौते भारतीय निर्यात के नए क्षितिज खोल रहे हैं।
तेजस और राफेल का जबरदस्त तालमेल
इस बीच फ्रांसीसी एयर डिफेंस के डिप्टी कमांडर जूलियन सबेने ने भारतीय लड़ाकू विमान तेजस की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आसमान में राफेल के साथ तेजस का तालमेल जबरदस्त है। तेजस में उड़ान भरने के बाद उन्होंने कहा कि इस विमान ने उन्हें फ्रांस के पुराने मिराज 2000 विमान की याद दिला दी। उन्होंने तेजस को भारतीय क्षमता और संप्रभुता के लिहाज से बड़ा कदम बताया। सबेने राजस्थान के जोधपुर में भारतीय वायुसेना की ओर से आयोजित बहुराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति में शामिल हो रहे हैं। उनकी टिप्पणी ने भारतीय स्वदेशी लड़ाकू विमान की वैश्विक स्वीकार्यता को रेखांकित किया।
भारतीय रक्षा निर्यात की उभरती कहानी
रक्षा सचिव के बयान से स्पष्ट है कि ब्रह्मोस और आकाश जैसी प्रणालियां भारत को रक्षा निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर मध्य एशिया तक कई देश इन मिसाइलों की कतार में हैं। स्वदेशी विकास और निर्माण क्षमता ने इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बना दिया है। ऑपरेशन सिंदूर जैसी परिस्थितियों में सिद्ध हुई क्षमता ने खरीदारों का विश्वास और मजबूत किया है। तेजस जैसे प्लेटफॉर्म के साथ इनका समन्वय भारतीय वायुसेना की ताकत को दर्शाता है। कुल मिलाकर यह प्रवृत्ति भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।