भारत और ईरान का संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक आधारों पर सदियों से जुड़ा हुआ है। व्यापार, ऊर्जा और संपर्क वानिकी ने दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बनाया है। मौजूदा पश्चिम एशिया संकट ने इन संबंधों की स्थिरता को नई चुनौती दी है।
भारत क्या निर्यात करता है ईरान को?
भारत, ईरान के लिए प्रमुख व्यापारिक भागीदारों में से एक रहा है, खासकर कृषि और दवा क्षेत्र में। ईरान भारतीय बासमती चावल का एक बड़ा आयातक है। इसके अलावा भारत से दवाइयां, गेहूं, चाय, चीनी, सूती कपड़ा, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग उत्पादों का बड़ा निर्यात होता है। फार्मा सेक्टर में भारत की मजबूती ईरान के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दौर में भी इसे स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विश्वसनीय आपूर्ति मिली है।
ईरान से भारत क्या आयात करता है?
ऊर्जा क्षेत्र भारत-ईरान व्यापार की आधारशिला रहा है। कभी ईरान भारत के लिए कच्चे तेल का शीर्ष आपूर्तिकर्ता था। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भले ही आयात कम हुआ हो, लेकिन संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुए। तेल के अलावा भारत ईरान से पिस्ता, खजूर सहित अन्य सूखे मेवे, पेट्रोकेमिकल उत्पाद और कुछ विशेष रासायनिक पदार्थ भी आयात करता है।
रुपया–रियाल तंत्र ने बचाए रखे रिश्ते
डॉलर आधारित लेन-देन पर पाबंदियों के बीच दोनों देशों ने रुपया–रियाल तंत्र के माध्यम से व्यापार को जारी रखा। यह व्यवस्था प्रतिबंधों के दबाव में भी व्यापार को स्थिर रखने और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बनाए रखने का व्यावहारिक समाधान साबित हुई। ऊर्जा सुरक्षा, फार्मा, खनन और आईटी क्षेत्रों में सहयोग लगातार जारी है।
चाबहार पोर्ट: व्यापार और रणनीति की धुरी
ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत का निवेश केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह परियोजना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक भारत की सीधी पहुँच सुनिश्चित करती है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक क्षमता बढ़ती है। पश्चिम एशिया तनाव के बीच यह परियोजना भारत के दीर्घकालिक हितों को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
Comments (0)