नई दिल्ली. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का चावल निर्यात 7.5 प्रतिशत घटकर 11.53 अरब डॉलर रह गया। मार्च महीने में यह गिरावट और अधिक तेज रही, जहां निर्यात 15.36 प्रतिशत घटकर 99.75 करोड़ डॉलर पर आ गया। यह गिरावट भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
पश्चिम एशिया संकट बना मुख्य वजह
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारत के चावल निर्यात को सीधा प्रभावित किया है। ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान जैसे प्रमुख बाजारों में निर्यात घटा है। इन देशों में अस्थिरता के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
बासमती चावल के निर्यात पर सबसे ज्यादा असर
ईरान भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा आयातक रहा है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण वहां ऑर्डर और भुगतान प्रक्रिया पर असर पड़ा है। जहाजों की आवाजाही में बाधा और वित्तीय लेन-देन में दिक्कतों के चलते निर्यातकों के सामने अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
भुगतान संकट से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई आयातकों ने मौजूदा अनुबंधों को पूरा करने और भुगतान भेजने में असमर्थता जताई है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए जोखिम बढ़ गया है और नए ऑर्डर मिलने की गति भी धीमी हो गई है। यह स्थिति व्यापारिक विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
भारत की वैश्विक स्थिति पर असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने 172 से अधिक देशों को 2.01 करोड़ टन चावल का निर्यात किया था, जिसकी कुल कीमत 12.5 अरब डॉलर थी। मौजूदा गिरावट भारत की इस मजबूत स्थिति पर दबाव डाल सकती है।
उत्पादन में बढ़ोतरी, फिर भी चुनौती बरकरार
देश में चावल उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में लगभग 4.7 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र से करीब 15 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 28 प्रतिशत है। बेहतर बीज, उन्नत कृषि तकनीक और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से औसत उपज भी बढ़ी है, लेकिन निर्यात में गिरावट ने इस उपलब्धि पर असर डाला है।
भविष्य की राह और संभावित समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात को स्थिर बनाए रखने के लिए नए बाजारों की तलाश और व्यापारिक रणनीतियों में बदलाव जरूरी होगा। साथ ही वैश्विक हालात सामान्य होने पर निर्यात में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल सरकार और निर्यातक दोनों स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और समाधान की दिशा में प्रयास जारी हैं।