भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील लगभग तैयार है और अब केवल अंतिम औपचारिकताएं बाकी हैं। मुंबई में आयोजित सिटी 2026 इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका इस समझौते को लेकर बेहद सकारात्मक हैं और दोनों पक्षों के बीच करीब 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उनके अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
व्यापार से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देश वैश्विक स्तर पर एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का चार दिवसीय भारत दौरा इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन नई दिल्ली के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है और यह साझेदारी आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है।
निवेश और तकनीक को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
सर्जियो गोर के मुताबिक प्रस्तावित व्यापार समझौते से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और तकनीकी क्षेत्र को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और फार्मा सेक्टर में मिलकर काम कर रहे हैं। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली लगभग 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से निर्यात की जाती हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक सहयोग का बड़ा उदाहरण है।
TRUST पहल से बढ़ेगा तकनीकी सहयोग
राजदूत ने बताया कि फरवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने TRUST पहल की शुरुआत की थी। इस पहल का उद्देश्य रणनीतिक तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भरोसेमंद सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर भी बढ़ेगा सहयोग
सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देश नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क पर समझौता हुआ है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर जोर
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर ऐसी सप्लाई चेन विकसित करना चाहते हैं, जिससे किसी एक देश के एकाधिकार पर निर्भरता कम हो सके। उनका मानना है कि यह पहल वैश्विक आर्थिक संतुलन और रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।