नई दिल्ली. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के अनुसार मई के महीने में गुजरात, महाराष्ट्र, पूर्वी तटीय राज्यों और हिमालय की तराई वाले इलाकों में सामान्य से अधिक दिनों तक लू चल सकती है। मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है, जिससे रात के समय भी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिन और रात दोनों समय बढ़ता तापमान इस बार गर्मी को और ज्यादा असहनीय बना सकता है।
मानसून की जल्द एंट्री से मिल सकती है राहत
भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार तय समय से पहले अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह पहुंच सकता है। IMD ने 14 से 16 मई के बीच मानसून के यहां दस्तक देने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग का कहना है कि मई महीने के दौरान देशभर में औसत वर्षा सामान्य से अधिक रह सकती है, हालांकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से कम होने की आशंका बनी हुई है।
दिल्ली-एनसीआर में बारिश और बादलों का असर
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में अगले कुछ दिनों तक मौसम अपेक्षाकृत राहत भरा रह सकता है। मौसम विभाग ने 4 और 5 मई को तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई है, जिससे तापमान में गिरावट आ सकती है। पिछले दिनों बढ़ती गर्मी और उमस के बाद यह बदलाव लोगों को कुछ राहत दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की वजह से उत्तर भारत के मौसम में यह परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
राजस्थान में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट
राजस्थान के कई हिस्सों में मौसम तेजी से करवट ले सकता है। हाल ही में हुई ओलावृष्टि के बाद मौसम विभाग ने 1 से 6 मई तक राज्य के कई जिलों में तेज हवाएं, बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की है। जयपुर, जोधपुर और बीकानेर सहित कई संभागों में खराब मौसम का असर दिखाई दे सकता है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
पहाड़ी और मध्य भारत के इलाकों में बदलेगा मौसम
पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पश्चिमी मैदानों और मध्य भारत के कई हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों में मौसम बदलने के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार 3 से 7 मई के बीच गरज-चमक के साथ बारिश और 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे कुछ क्षेत्रों में तापमान में कमी आएगी, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।
अल नीनो की संभावित वापसी पर बनी नजर
मौसम विभाग मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की संभावित गतिविधियों पर भी लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल प्रशांत महासागर में स्थितियां सामान्य बनी हुई हैं, लेकिन आने वाले समय में समुद्री सतह के तापमान में बदलाव शुरू हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि अल नीनो सक्रिय होता है तो इसका असर मानसून की तीव्रता और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है। इसी वजह से वैश्विक जलवायु संकेतकों की लगातार निगरानी की जा रही है।