नई दिल्ली. विश्व की सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंकिंग संस्थाओं में शामिल अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति की व्यापक समीक्षा के लिए कई उच्चस्तरीय कार्यबल गठित किए हैं। इन कार्यबलों में भारत से जुड़े तीन प्रमुख विशेषज्ञों को शामिल किया जाना वैश्विक आर्थिक और तकनीकी जगत में भारतीय प्रतिभा की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत माना जा रहा है। इन समितियों का उद्देश्य बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, नई तकनीकों और वित्तीय चुनौतियों के अनुरूप भविष्य की नीतियों के लिए ठोस सुझाव तैयार करना है। कार्यबल स्वतंत्र रूप से अपनी सिफारिशें तैयार करेंगे, जिन्हें बाद में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
रघुराम राजन संभालेंगे बैलेंस शीट नीति की समीक्षा
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट नीति की समीक्षा करने वाले कार्यबल में शामिल किया गया है। यह समूह वर्तमान बैलेंस शीट व्यवस्था की उपयोगिता, उससे जुड़े लाभ-हानि और संस्थागत प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करेगा। वैश्विक वित्तीय संकट, महामारी के बाद अपनाई गई मौद्रिक नीतियों तथा बड़े पैमाने पर परिसंपत्तियों की खरीद जैसी व्यवस्थाओं ने केंद्रीय बैंकों की भूमिका को पहले से अधिक जटिल बना दिया है। ऐसे में इस कार्यबल की सिफारिशें भविष्य की मौद्रिक नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता पर काम करेंगे राज चेट्टी
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री राज चेट्टी को आर्थिक आंकड़ों से संबंधित कार्यबल में शामिल किया गया है। यह समूह इस बात का अध्ययन करेगा कि केंद्रीय बैंक को निर्णय लेने के लिए अधिक सटीक, अद्यतन और विश्वसनीय आंकड़े किस प्रकार उपलब्ध कराए जा सकते हैं। राज चेट्टी आर्थिक असमानता, सामाजिक गतिशीलता, रोजगार और श्रम बाजार पर अपने शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। वास्तविक समय के आंकड़ों के विश्लेषण में उनकी विशेषज्ञता भविष्य की आर्थिक नीति को अधिक प्रभावी और साक्ष्य-आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोजगार पर देंगी आशा शर्मा सुझाव
प्रौद्योगिकी क्षेत्र की वरिष्ठ अधिकारी आशा शर्मा को उत्पादकता और रोजगार से जुड़े कार्यबल में शामिल किया गया है। यह समूह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई प्रौद्योगिकियों का अर्थव्यवस्था, रोजगार, उत्पादकता और दीर्घकालिक विकास पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करेगा। डिजिटल परिवर्तन की तेज रफ्तार के बीच यह विषय विश्व की लगभग सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में केंद्रीय बैंकों को तकनीकी बदलावों के आर्थिक प्रभाव को भी अपनी नीति निर्माण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
वैश्विक मंच पर भारतीय विशेषज्ञों की बढ़ती प्रतिष्ठा
अंतरराष्ट्रीय वित्त, अर्थशास्त्र और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय मूल के विशेषज्ञ लगातार महत्वपूर्ण संस्थानों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा रहे हैं। यह नियुक्तियां केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि यह दर्शाती हैं कि भारतीय शिक्षा, शोध और पेशेवर क्षमता को वैश्विक स्तर पर गंभीरता से स्वीकार किया जा रहा है। बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महंगाई नियंत्रण और रोजगार जैसे जटिल विषयों पर भारतीय विशेषज्ञों की भागीदारी आने वाले वर्षों में नीति निर्माण को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
भविष्य की आर्थिक नीतियों पर पड़ सकता है व्यापक प्रभाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के निर्णयों का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजार, निवेश, ब्याज दरों, मुद्रा विनिमय और पूंजी प्रवाह पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इन कार्यबलों की सिफारिशों को अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय मूल के विशेषज्ञों की इस प्रक्रिया में भागीदारी वैश्विक आर्थिक विमर्श में भारत की बौद्धिक उपस्थिति को और मजबूत करने वाली उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।