नई दिल्ली. रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने दो सरकारी जहाज निर्माण कंपनियों के साथ कुल 53,866 करोड़ रुपये के अनुबंध किए हैं। इन अनुबंधों के तहत आठ अगली पीढ़ी के कॉर्वेट यानी एनजीसी खरीदे जाएंगे। यह सौदा भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वदेशी निर्माण पर जोर देने वाली यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की नीति को आगे बढ़ाती है।
आठ अगली पीढ़ी के कॉर्वेट की खरीद
कॉर्वेट छोटे आकार के लेकिन तेज गति वाले युद्धपोत होते हैं जो फ्रिगेट और विध्वंसक पोतों की तुलना में आकार में छोटे होते हैं। इन आठ कॉर्वेट को अगली पीढ़ी के आधुनिक युद्धपोत के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें अत्याधुनिक सेंसर, हथियार प्रणाली और युद्धक क्षमताएं होंगी। ये पोत समुद्री सुरक्षा, गश्त और युद्धक अभियानों में नौसेना की मदद करेंगे। इस परियोजना से नौसेना की सतह युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
जीआरएसई और जीएसएल की विभाजित जिम्मेदारी
अनुबंध के अनुसार गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड यानी जीआरएसई पांच कॉर्वेट का निर्माण करेगी। वहीं गोवा शिपयार्ड लिमिटेड यानी जीएसएल शेष तीन कॉर्वेट बनाएगी। दोनों कंपनियां रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं और पहले भी नौसेना के लिए कई युद्धपोत बना चुकी हैं। प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए इन दोनों कंपनियों का चयन किया गया है। इससे घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
पूर्ण स्वदेशी डिजाइन की बड़ी उपलब्धि
यह परियोजना इसलिए खास है क्योंकि इसमें युद्धपोतों का पूरा डिजाइन भारतीय नौसेना ने स्वदेशी रूप से तैयार किया है। मंत्रालय के अनुसार यह पहली ऐसी परियोजना है जिसमें जहाजों का डिजाइन भारतीय नौसेना खुद बनाएगी और निर्माण का काम चुने गए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम करेंगे। पहले कई परियोजनाओं में विदेशी डिजाइन या सहयोग पर निर्भरता रहती थी। यह कदम भारत की युद्धपोत डिजाइन क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाता है।
भारतीय युद्धपोत निर्माण क्षमता को मजबूत बढ़ावा
इस सौदे से भारत की स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमताओं को बड़ा बल मिलेगा। घरेलू शिपयार्ड को बड़े ऑर्डर मिलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और तकनीक में और सुधार होगा। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को रक्षा क्षेत्र में मजबूती प्रदान करती है। भविष्य में और अधिक स्वदेशी युद्धपोतों के निर्माण का रास्ता भी इससे खुलेगा। भारतीय उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद मिलेगी।
नौसेना की युद्धक क्षमता पर दीर्घकालिक प्रभाव
आठ नए कॉर्वेट शामिल होने से भारतीय नौसेना की सतह युद्धक ताकत में इजाफा होगा। ये पोत समुद्री सीमाओं की निगरानी, दुश्मन के जहाजों पर नजर रखने और युद्ध की स्थिति में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे। आधुनिक सेंसर और हथियार प्रणालियों से लैस होने के कारण ये समकालीन चुनौतियों से निपटने में सक्षम होंगे। कुल मिलाकर यह सौदा भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।