कोलकाता: इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) के एक वरिष्ठ संन्यासी को संगठन की सभी आधिकारिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है। साथ ही उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे भविष्य में मीडिया, सरकारी अधिकारियों या किसी भी सार्वजनिक मंच पर इस्कॉन का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे। इस फैसले की जानकारी स्वयं संन्यासी ने सार्वजनिक बयान जारी कर दी, जिसके बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
आधिकारिक जिम्मेदारियों से किया गया मुक्त
जारी बयान में वरिष्ठ संन्यासी ने कहा कि इस्कॉन प्रबंधन ने उन्हें संगठन की सभी आधिकारिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे इस निर्णय का सम्मान करते हैं और संगठन द्वारा जारी सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे। उन्होंने मीडिया संस्थानों और पत्रकारों से भी अनुरोध किया कि भविष्य में उन्हें इस्कॉन के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में न बुलाया जाए और न ही संगठन की ओर से कोई प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया जाए।
इन कारणों का किया गया उल्लेख
संन्यासी ने अपने बयान में कहा कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का मुख्य कारण पिछले कुछ वर्षों में किए गए उनके सार्वजनिक हस्तक्षेप रहे। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में हिंदुओं और इस्कॉन भक्तों पर कथित उत्पीड़न को लेकर मीडिया से बातचीत करना, चिन्मय कृष्ण प्रभु के समर्थन में बयान देना तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा इस्कॉन पर गायों को कसाइयों को बेचने के आरोप लगाने के बाद उन्हें कानूनी नोटिस भेजना भी कार्रवाई के कारणों में शामिल है।
साइबर शिकायत और सनातन धर्म पर बयान भी बने वजह
बयान के अनुसार, कॉमेडियन सुरलीन कौर के खिलाफ इस्कॉन पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर साइबर शिकायत दर्ज कराना, सनातन धर्म को लेकर दिए गए विवादित बयानों का सार्वजनिक विरोध करना और सोशल मीडिया पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वर्ष 1976 की न्यूयॉर्क रथयात्रा से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों पर पोस्ट साझा करना भी संगठन द्वारा दर्ज कारणों में शामिल बताया गया है।
रिपब्लिक टीवी इंटरव्यू को बताया 'आखिरी कील'
वरिष्ठ संन्यासी ने दावा किया कि 29 मई 2026 को रिपब्लिक टीवी को दिया गया उनका इंटरव्यू इस पूरी कार्रवाई का "आखिरी कील" साबित हुआ। उनके अनुसार, उसी के बाद संगठन ने उनके खिलाफ अंतिम निर्णय लिया।
संगठन के प्रति जताई सम्मान और शुभकामनाएं
हालांकि इस निर्णय के बावजूद संन्यासी ने इस्कॉन के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से उन्हें भक्तों और शुभचिंतकों का जो प्रेम और समर्थन मिला, उसके लिए वे सभी के आभारी हैं। साथ ही उन्होंने इस्कॉन की निरंतर प्रगति, विस्तार और सफलता की कामना करते हुए संगठन के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की।