कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित विधानसभा सीट भवानीपुर पर उपचुनाव का पारा चढ़ चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच होने वाले इस मुकाबले में अब 'विचारधारा की जंग' साफ दिखाई दे रही है। जहां शुभेंदु के नामांकन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने इसे 'प्रतिष्ठा की लड़ाई' बनाया था, वहीं ममता बनर्जी अपने नामांकन के जरिए 'बहुलतावाद' (Pluralism) का बड़ा संदेश देने की तैयारी में हैं।
ममता का मास्टरस्ट्रोक: 'मिनी इंडिया' की झलक
ममता बनर्जी बुधवार को अलीपुर के सर्वे बिल्डिंग में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगी। टीएमसी सूत्रों के मुताबिक, इस नामांकन की सबसे बड़ी खासियत इसके प्रस्तावक (Proposers) होंगे। ममता ने जानबूझकर समाज के विभिन्न वर्गों, धर्मों और भाषाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरों को चुना है।
संभावित प्रस्तावकों की सूची:
रूबी हकीम: कोलकाता के मेयर और मंत्री फिरहाद हकीम की पत्नी।
बबलू सिंह: वार्ड नंबर 71 के टीएमसी ब्लॉक अध्यक्ष।
मीरज शाह: भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी से जुड़े प्रमुख चेहरा।
क्यों अहम है यह रणनीति?
भवानीपुर को 'मिनी इंडिया' कहा जाता है। यहाँ की जनसांख्यिकी बेहद दिलचस्प है:
विविध समुदाय: यहाँ बंगाली मतदाताओं के साथ-साथ गुजराती, पंजाबी, मारवाड़ी और जैन समुदाय की बड़ी आबादी है।
धार्मिक विविधता: वार्ड नंबर 77 जैसे इलाकों में मुस्लिम आबादी है, तो वहीं अन्य वार्डों में बिहार, ओडिशा और झारखंड के लोग दशकों से रह रहे हैं।
राजनीतिक संदेश: ममता बनर्जी खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश करना चाहती हैं जो हर धर्म और भाषा के लोगों को साथ लेकर चलती हैं, जिससे बीजेपी के 'ध्रुवीकरण' वाले एजेंडे को काट दिया जा सके।
प्रस्तावक बबलू सिंह का बयान:
"हमारी मुख्यमंत्री सभी धर्मों और भाषाओं के लोगों को एक साथ लेकर चलने में विश्वास रखती हैं। उनके नामांकन में भी यही तस्वीर दिखेगी। उनका प्रस्तावक बनना मेरे लिए गर्व की बात है।"
नामांकन के दिन शक्ति प्रदर्शन
नामांकन के दिन तृणमूल कांग्रेस एक भव्य रैली का आयोजन करेगी। इस रैली में सुब्रत बख्शी, फिरहाद हकीम और देबाशीष कुमार जैसे दिग्गज नेता शामिल होंगे। टीएमसी का मुख्य उद्देश्य इस रैली के जरिए 'शांति और सह-अस्तित्व'** का संदेश देना है।