नई दिल्ली. भारत में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर अब अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन भी बयानबाजी कर रही हैं। मिलबेन ने दावा किया कि इन प्रदर्शनों के लिए कॉकरोच जनता पार्टी को जॉर्ज सोरोस से फंडिंग मिलती है। उन्होंने कहा कि बार-बार यही सवाल आ रहा है कि आखिर इन लोगों की फंडिंग कौन कर रहा है। उन्होंने दावा किया इसके पीछे भी वही लोग हैं जो कि कई ऐसे प्रदर्शनों को फंड देते हैं। खास तौर पर जब कोई दक्षिणपंथी नेता सत्ता में होता है तो ये लोग फंड करते हैं और उनका नाम है जॉर्ज सोरोस। शुक्रवार को एक और वीडियो पोस्ट करते हुए मिलबेन ने राहुल गांधी पर हमला किया।
जॉर्ज सोरोस पर आरोप
मिलबेन ने दावा किया कि दुनियाभर में जॉर्ज सोरोस अराजकतावादी प्रदर्शनों को फंड करते हैं। उन्होंने कहा कि अभिजीत दीपके ने खुद यह बात कबूली थी कि जॉर्ज सोरोस उनकी मदद करते हैं। उन्होंने यह बयान बुधवार को दिया था। मिलबेन ने अभिजीत दीपके को सलाह दी कि वह प्रधानमंत्री के साथ बैठकर बात करें और अपनी ऊर्जा को देश की प्रगति में लगाएं। उनके अनुसार बाहरी फंडिंग से होने वाले प्रदर्शन देश के हित में नहीं होते। मिलबेन ने बार-बार सोरोस के नाम का जिक्र किया।
राहुल गांधी पर सीधा हमला
मिलबेन ने कहा कि देश के युवाओं को गलत रास्ते पर नहीं जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी का भी नाम लेते हुए कहा कांग्रेस पार्टी केवल शोर मचा रही है। इसमें कोई भी समाधान नहीं है। आवाज ऐसी होनी चाहिए जो कि एकता का संदेश दे और लोगों को साथ लाए। आपकी आवाज ऐसे बदलाव के लिए होनी चाहिए जो देश का हित करे। राहुल गांधी और दीपके किसी तरह की एकता के लिए काम नहीं कर रहे हैं। उन्हें देश से कोई मतलब ही नहीं है। वे केवल शोर मचा रहे हैं। ऐसे व्यवहार से हमेशा तबाही आती है।
अभिजीत दीपके का जवाब
अभिजीत दीपके ने कहा कि किसी भी विदेशी नागरिक को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि हम लोग अपने देश के मुद्दों से निपटने में सक्षम हैं। किसी बाहरी के दखल की जरूरत नहीं है। दीपके ने मिलबेन के बयानों को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया। उनके अनुसार देश की समस्याएं देश के लोग ही सुलझाएंगे। विदेशी टिप्पणियों की कोई जरूरत नहीं है। यह जवाब मिलबेन के आरोपों के जवाब में आया।
प्रदर्शनों और फंडिंग का मुद्दा
मिलबेन ने भारत में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर अपनी राय रखी और उन्हें बाहरी फंडिंग से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि जब दक्षिणपंथी सरकार सत्ता में होती है तब ऐसे प्रदर्शनों को बढ़ावा दिया जाता है। सोरोस के नाम का बार-बार इस्तेमाल किया गया। अभिजीत दीपके पर भी पहले आरोप लगाए गए थे। मिलबेन का कहना है कि युवाओं को सही दिशा में जाना चाहिए न कि विनाशकारी रास्ते पर। उनके बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं।
विदेशी टिप्पणी और भारतीय प्रतिक्रिया
अमेरिकी गायिका के बयानों ने भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। एक तरफ मिलबेन देश की एकता और प्रगति की बात कर रही हैं तो दूसरी तरफ दीपके जैसे लोग विदेशी हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस पर लगाए गए आरोप राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं। विदेशी नागरिकों द्वारा भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करना संवेदनशील मुद्दा है। दोनों पक्षों के बयान सार्वजनिक चर्चा में हैं और आगे की प्रतिक्रियाएं देखी जा सकती हैं।