नई दिल्ली | बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित खतरों से बचाने और उनके इस्तेमाल पर सख्त नियम बनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।
एमराल्ड हाइट्स स्कूल ने दायर की याचिका
यह याचिका एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल और उसके निदेशक की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रखना केंद्र और राज्य सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। याचिका में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने को एक व्यावहारिक विकल्प बताया गया है।
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता
याचिका में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया का अनियंत्रित इस्तेमाल बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके कारण डिप्रेशन, घबराहट, चिंता, भावनात्मक परेशानी और आत्मसम्मान में कमी जैसी समस्याएं बढ़ने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ताओं ने बच्चों के व्यवहार से जुड़ा डेटा एकत्र करने और ऐसे डिजिटल डिजाइन पर भी सवाल उठाए हैं, जो बच्चों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय बनाए रखने के लिए तैयार किए जाते हैं।
ऑनलाइन खतरों से बच्चों को बचाने की मांग
याचिका के मुताबिक, सोशल मीडिया के कुछ नुकसान तुरंत सामने नहीं आते। कई बार माता-पिता और शिक्षकों को इनके बारे में तब पता चलता है, जब बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ चुका होता है। ऐसे में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए प्रभावी नियम बनाने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस से बढ़ी चर्चा
बच्चों में सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। याचिका में मानसिक स्वास्थ्य, साइबर बुलिंग और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े जोखिमों का मुद्दा उठाया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की ओर से केंद्र को नोटिस जारी किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। फिलहाल केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है और मामले में अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित है।