नई दिल्ली: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर कई गंभीर आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1.87 लाख मामले दर्ज किए गए, जो 2023 की तुलना में करीब 6 प्रतिशत अधिक हैं। इनमें पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या 69,191 रही।
पॉक्सो के तहत 69 हजार से ज्यादा मामले
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में पॉक्सो यानी Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत कुल 69,191 मामले दर्ज हुए। इन मामलों में 70,132 बच्चे पीड़ित बताए गए हैं। यानी बच्चों के खिलाफ दर्ज कुल अपराधों में पॉक्सो से जुड़े मामलों की हिस्सेदारी करीब 37 प्रतिशत रही।
गंभीर यौन अपराध की श्रेणी में 44 हजार से ज्यादा मामले
पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत penetrative sexual assault और aggravated penetrative sexual assault से जुड़े 44,126 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 44,567 बच्चे पीड़ित थे। इनमें 43,675 लड़कियां और 892 लड़के शामिल थे। यही वह आंकड़ा है जिसे कई रिपोर्टों में 43 हजार से अधिक बच्चियों के यौन शोषण के रूप में सामने रखा गया है।
किशोर उम्र की बच्चियां सबसे ज्यादा प्रभावित
आंकड़ों में पीड़ित बच्चों की उम्र भी दर्ज की गई है। 16 से 18 वर्ष की उम्र के 23,368 बच्चे इन मामलों में पीड़ित थे, जिनमें 129 लड़के शामिल थे। वहीं 12 से 16 वर्ष की उम्र के 16,801 बच्चे पीड़ित पाए गए, जिनमें 369 लड़के थे। इसके अलावा 6 से 12 वर्ष की उम्र के 3,438 बच्चे और छह वर्ष से कम उम्र के 831 बच्चे भी इन गंभीर अपराधों के शिकार हुए।
सबसे चौंकाने वाली बात- आरोपी अक्सर कोई अनजान नहीं था
NCRB के आंकड़ों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन मामलों में आरोपी अक्सर पीड़ित बच्चे के लिए कोई अजनबी व्यक्ति नहीं था। धारा 4 और 6 के तहत दर्ज मामलों में 96.6 प्रतिशत मामलों में आरोपी बच्चे का परिचित था। यानी अधिकांश मामलों में अपराध किसी ऐसे व्यक्ति पर कथित रूप से किया गया, जो पीड़ित की सामाजिक या व्यक्तिगत पहचान के दायरे में था।
दोस्त से लेकर पड़ोसी और परिवार तक, कई रिश्ते शामिल
रिपोर्ट के अनुसार, 22,000 से अधिक मामलों में दोस्तों, ऑनलाइन दोस्तों या शादी का झांसा देने वाले लिव-इन पार्टनर जैसे परिचित लोगों की भूमिका सामने आई। वहीं 16,668 मामलों में परिवार के दोस्तों, पड़ोसियों, नियोक्ताओं और अन्य परिचित लोगों को आरोपी के रूप में दर्ज किया गया।
परिवार के लोग भी बने आरोपी
NCRB के आंकड़ों में परिवार के भीतर होने वाले अपराधों का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, 3,658 मामलों में आरोपी परिवार का सदस्य था। इसके अलावा 1,492 मामलों में आरोपी अज्ञात या उसकी पहचान स्पष्ट नहीं थी। आंकड़े यह दिखाते हैं कि बच्चों की सुरक्षा का सवाल केवल सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आसपास के सामाजिक और पारिवारिक दायरे से भी जुड़ा हुआ है।
आंकड़े क्या संकेत देते हैं?
NCRB के ये आंकड़े बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की गंभीरता और उनके परिचित लोगों से जुड़े होने की बड़ी संख्या को सामने रखते हैं। खास तौर पर 96.6 प्रतिशत मामलों में आरोपी का परिचित होना इस बात को रेखांकित करता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल अनजान लोगों से सावधानी पर्याप्त नहीं है। परिवार, स्कूल, पड़ोस और डिजिटल संपर्कों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता और सतर्कता भी महत्वपूर्ण है।