नीट (NEET) पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे पर कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने आज, 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ प्रस्तावित इस प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर पर छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और उनके अभिभावक बड़ी संख्या में जुटे हैं।
NEET पेपर लीक और बेरोजगारी को लेकर प्रदर्शन
कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया है कि उसका विरोध प्रदर्शन नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और देश में बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि इन मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि बार-बार परीक्षा विवाद सामने आने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी से भी असंतोष बढ़ा है।
संसद मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई
आज से संसद का मानसून सत्र भी शुरू हो रहा है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद भवन और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस का प्रयास है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का मुद्दा भी बना केंद्र
CJP का कहना है कि यह मार्च सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को कथित तौर पर भूख हड़ताल के दौरान पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के विरोध में भी आयोजित किया जा रहा है। संगठन के अनुसार, सोनम वांगचुक के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भूख हड़ताल शुरू की है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से आवश्यक कदम उठाए गए।
कई हस्तियों ने जताया समर्थन
CJP का दावा है कि उसके आंदोलन को कई सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन मिला है। संगठन के अनुसार, लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह और अर्थशास्त्री जयती घोष ने प्रदर्शनकारियों के मुद्दों पर चिंता जताई है। हालांकि, इन हस्तियों के समर्थन और उनके बयानों के संबंध में आधिकारिक पुष्टि संबंधित स्रोतों से की जानी चाहिए।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हो रहे इस विरोध प्रदर्शन पर राजनीतिक दलों, छात्रों और आम लोगों की नजर बनी हुई है। अब यह देखना होगा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ता है या प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई टकराव की स्थिति बनती है।
आंदोलन का मुख्य मकसद
1. NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच
आंदोलनकारियों का आरोप है कि NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियां हुई हैं। उनकी मांग है कि इन मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
2. केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
CJP का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में हुई कथित अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
3. बढ़ती बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में सुधार
आंदोलन में शामिल छात्र और युवा सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया में देरी, परीक्षा परिणामों के लंबित रहने और रोजगार के सीमित अवसरों को लेकर भी विरोध जता रहे हैं। उनकी मांग है कि:
- सरकारी भर्तियां समय पर पूरी हों।
- परीक्षा परिणाम जल्द घोषित किए जाएं।
- युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
4. छात्रों के भविष्य की सुरक्षा
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बार-बार परीक्षा रद्द होने, पेपर लीक और भर्ती में देरी से लाखों छात्रों का समय और भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए वे ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जिसमें परीक्षाएं पारदर्शी और भरोसेमंद हों।
5. सोनम वांगचुक के मुद्दे पर विरोध
आंदोलन का एक हिस्सा सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल के दौरान पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के विरोध से भी जुड़ा है। CJP इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़कर देख रही है।
सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से समय-समय पर कहा गया है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। विभिन्न परीक्षा विवादों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं। वहीं, किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर सरकार का अपना अलग पक्ष है।