नई दिल्ली। भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को हमेशा “रोटी-बेटी” के संबंध के रूप में देखा जाता रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच कुछ राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति भी बनी है। इसी बीच बिहार के पूर्णिया प्रशासन द्वारा नेपाली मूल की महिलाओं को भारतीय नागरिकता प्रक्रिया में राहत देने की पहल ने लोगों का ध्यान खींचा है। प्रशासन का कहना है कि भारत में विवाह कर आने वाली नेपाली महिलाओं को अब अधिक सरल और व्यवस्थित तरीके से नागरिकता दिलाने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
नेपाली महिलाओं के लिए बनाई गई विशेष व्यवस्था
पूर्णिया जिलाधिकारी की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रखंड मुख्यालयों पर विशेष शिविर लगाकर नेपाली महिलाओं की नागरिकता से जुड़ी प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। इसके लिए एक विशेष समिति का भी गठन किया गया है, जो दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताओं को तेज गति से पूरा कराने में मदद करेगी। अब तक कई महिलाओं को लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और दस्तावेजी जटिलताओं के कारण वर्षों तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था से इस प्रक्रिया में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सीमा पर नए नियमों से बढ़ी आर्थिक चिंता
हाल ही में नेपाल सरकार द्वारा भारत-नेपाल सीमा पर नए भंसार नियम लागू किए गए हैं, जिसके बाद सीमावर्ती इलाकों में व्यापार प्रभावित हुआ है। छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बनने लगी है। कई जगहों पर इन नियमों के विरोध की आवाजें भी उठ रही हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ऐसे समय में नेपाली बहुओं की नागरिकता प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला दोनों देशों के सामाजिक रिश्तों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है।
1950 की संधि से मजबूत हुए थे रिश्ते
भारत-नेपाल शांति और मैत्री संधि 1950 दोनों देशों के बीच संबंधों की सबसे मजबूत आधारशिला मानी जाती है। इसी संधि के कारण दोनों देशों के नागरिकों को आवाजाही, व्यापार और पारिवारिक संबंधों में विशेष सुविधाएं मिलती रही हैं। भारत और नेपाल की खुली सीमा तथा सांस्कृतिक समानताएं इन रिश्तों को और गहरा बनाती हैं। हालांकि नेपाल के कुछ राजनीतिक दल समय-समय पर इस संधि की समीक्षा या समाप्ति की मांग भी उठाते रहे हैं, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बहस होती रही है।
भारतीय नागरिकता पाने के लिए क्या हैं नियम
भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नेपाली महिलाओं को भारतीय नागरिकता पंजीकरण प्रक्रिया के माध्यम से प्रदान की जाती है। इसके लिए महिला का विवाह किसी भारतीय नागरिक से वैध रूप से होना आवश्यक है। साथ ही विवाह के बाद भारत में कम से कम सात वर्षों तक निवास करना भी जरूरी शर्तों में शामिल है। इसके अलावा पहचान पत्र, विवाह प्रमाण पत्र और निवास से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाती है। पुलिस सत्यापन और प्रशासनिक अनुमोदन के बाद नागरिकता प्रदान की जाती है।
सामाजिक रिश्तों को मजबूती देने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच राजनीतिक परिस्थितियां चाहे जैसी भी रहें, लेकिन दोनों देशों के पारिवारिक और सांस्कृतिक संबंध बेहद गहरे हैं। सीमावर्ती इलाकों में हजारों परिवार ऐसे हैं, जिनके रिश्ते दोनों देशों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में नेपाली महिलाओं के लिए नागरिकता प्रक्रिया को आसान बनाना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि सामाजिक विश्वास और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।