नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से दिए गए भाषण में इस्तेमाल किए गए 'दिमागी नक्सल' शब्द पर मचे राजनीतिक घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनका यह बयान एक 'होम्योपैथिक दवा' की तरह था, जिसके असर से समाज में छिपे ऐसे लोग खुद-ब-खुद सामने आ रहे हैं।
लाल किले से दी थी 'होम्योपैथी खुराक'
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने लाल किले के प्राचीर से 'दिमागी नक्सल' नाम की एक होम्योपैथिक खुराक दी थी। उन्होंने होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह दवा की शुरुआत में बीमारी के लक्षण उभरकर सामने आते हैं और फिर इलाज आगे बढ़ता है, ठीक उसी तरह इस बयान के बाद एक-एक करके लोग खुद को बेनकाब कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इससे जनता अब समाज में इस मानसिकता को बढ़ावा देने वालों को पहचान पा रही है।
सोशियो-पॉलिटिकल स्पेस में छिड़ी बहस
प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस वाले भाषण के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में 'दिमागी नक्सल' शब्द को लेकर जोरदार बहस छिड़ गई थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम सहित कई प्रमुख हस्तियों ने सोशल मीडिया पर खुद को 'दिमागी नक्सल' बताते हुए प्रतिक्रिया दर्ज कराई थी। इसके जवाब में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वा शर्मा और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने पलटवार करते हुए कहा था कि संविधान की अनदेखी करने वालों और अलगाववादी सोच का समर्थन करने वालों को ही यह संज्ञा दी गई है।
'बीमारी की तरह फैल रही मानसिकता'
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में संकेत दिया कि यह सोच समाज के लिए एक विकार या बीमारी की तरह है। उन्होंने कहा कि जब दवा दी जाती है, तो प्रभाव दिखना स्वाभाविक है। एसआरसीसी के छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम ने युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि देश के विकास और नीतियों का विरोध करने वाले तत्वों की पहचान होना बेहद जरूरी है।
2013 से 2026: भारत की आर्थिक प्रगति का जिक्र
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने 13 साल पहले (2013 में) इसी कॉलेज में दिए गए अपने भाषण का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में देश नीतिगत पंगुता (Policy Paralysis) और आर्थिक निराशा के दौर से गुजर रहा था, जबकि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।