नई दिल्ली - भारत ने ग्लोबल ट्रेड में भारतीय रुपये की भूमिका मजबूत करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। विदेश व्यापार नीति (FTP) के कुछ नियमों में बदलाव किए गए हैं। उद्योग संगठन CII के मुताबिक, इन बदलावों से भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी बिक्री का इनवॉइस बनाना आसान होगा और भारतीय रुपये में भुगतान हासिल करने की प्रक्रिया में भी अधिक सुविधा मिलेगी।
निर्यातकों के लिए आसान होगा इनवॉइस बनाना
नए बदलावों का सबसे बड़ा असर एक्सपोर्टर्स पर पड़ने की उम्मीद है। विदेशी खरीदारों के साथ होने वाले कारोबार में इनवॉइस तैयार करने और भुगतान की व्यवस्था में अधिक लचीलापन मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियां अपने विदेशी व्यापार में रुपये को अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगी। यह बदलाव खासतौर पर उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो ऐसे देशों के साथ कारोबार करती हैं जहां भारतीय रुपये में व्यापार और भुगतान की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
रुपये में पेमेंट को मिलेगा बढ़ावा
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ भारतीय मुद्रा को वैश्विक व्यापार में ज्यादा स्वीकार्य बनाना है। विदेशी व्यापार में रुपये में भुगतान बढ़ने से भारतीय कंपनियों को कुछ मामलों में मुद्रा विनिमय से जुड़े जोखिमों को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है। साथ ही ट्रेड सेटलमेंट की प्रक्रिया में भी विकल्प बढ़ेंगे।
CII ने बताया क्यों अहम है बदलाव
CII की EXIM पर नेशनल कमेटी के चेयरमैन और पैटन इंटरनेशनल के MD संजय बुधिया ने बदलाव का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग इस गति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्री सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहती है, ताकि ग्लोबल ट्रेड में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत हो सके।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है रुपया?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में किसी देश की मुद्रा का इस्तेमाल बढ़ना उसकी आर्थिक पहुंच के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि भारतीय निर्यातक ज्यादा कारोबार रुपये में कर पाते हैं, तो इससे भारत की मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धीरे-धीरे अधिक स्वीकार्यता मिल सकती है। रुपये में व्यापार बढ़ने से भारतीय कंपनियों के लिए भुगतान के विकल्प भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि विदेशी खरीदार और कारोबारी साझेदार रुपये में भुगतान को किस स्तर तक स्वीकार करते हैं।
एक्सपोर्टर्स को मिल सकती है ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी
CII के अनुसार, नीति में बदलाव से निर्यातकों को कारोबार करते समय अधिक फ्लेक्सिबिलिटी और निश्चितता मिलेगी। आसान इनवॉइसिंग और रुपये में भुगतान का विकल्प भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार को सुविधाजनक बना सकता है।
भारत की ग्लोबल ट्रेड रणनीति का हिस्सा
रुपये को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ावा देना भारत की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। सरकार घरेलू मुद्रा में ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को बढ़ावा देकर भारत के व्यापारिक हितों को मजबूत करना चाहती है। हालिया बदलाव को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगर विदेशी कंपनियों के बीच रुपये में भुगतान की स्वीकार्यता लगातार बढ़ती है, तो आने वाले समय में भारतीय मुद्रा की वैश्विक भूमिका और मजबूत हो सकती है।
