करीब तीन दशक से अधिक समय बाद कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकवाद निरोधी अदालत में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस का दावा है कि यह हत्या कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने की सुनियोजित हिंसा का हिस्सा थी।
परिवार ने जताई नाराज़गी
सरला भट्ट के परिजनों का कहना है कि इतने लंबे इंतजार के बाद मिली कानूनी कार्रवाई उनके माता-पिता के लिए कोई मायने नहीं रखती। परिवार का कहना है कि समय पर न्याय मिलता तो उसका महत्व अलग होता, लेकिन अब केवल दोषियों को सजा मिलने की उम्मीद ही बची है।
क्या है पुलिस का दावा?
चार्जशीट के अनुसार सरला भट्ट का अपहरण प्रतिबंधित संगठन JKLF से जुड़े आतंकियों ने किया था। पुलिस का आरोप है कि उन्हें प्रताड़ित करने के बाद हत्या कर दी गई। मुख्य आरोपी खुर्शीद अहमद चालकू पर गोली मारने का आरोप है, जबकि तीन अन्य आरोपी अब इस दुनिया में नहीं हैं।
कौन थीं सरला भट्ट?
27 वर्षीय सरला भट्ट दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग की रहने वाली थीं और श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (SKIMS) में नियोनेटोलॉजी विभाग में नर्स के रूप में कार्यरत थीं। आतंकवाद के दौर में लगातार धमकियों के बावजूद उन्होंने अपनी ड्यूटी नहीं छोड़ी थी।
न्याय और देरी पर फिर उठी बहस
इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद एक बार फिर न्याय में देरी और आतंकवाद से जुड़े पुराने मामलों की सुनवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। परिवार का मानना है कि दोषियों को सजा मिलना जरूरी है, लेकिन वर्षों की देरी ने न्याय की भावना को कमजोर कर दिया।