नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG भवन गिरने की घटना को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि इस हादसे की जिम्मेदारी केवल इमारत के मालिक पर डालना पर्याप्त नहीं है। MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भूमिका और जिम्मेदारी की भी जांच जरूरी है।
‘हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’, कोर्ट ने जताई चिंता
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कोर्ट ने अधिकारियों से राहत और बचाव अभियान तेज करने को कहा, ताकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
MCD से पूछा- PG पर निगरानी की व्यवस्था क्या है?
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने MCD की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि दिल्ली में चल रहे PG और हॉस्टल की सुरक्षा तथा नियमन के लिए क्या व्यवस्था मौजूद है। अदालत ने कहा कि यदि संबंधित एजेंसियां अपनी वैधानिक जिम्मेदारियां सही तरीके से निभातीं, तो ऐसी घटनाओं को संभवतः टाला जा सकता था।
DU की हॉस्टल व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय की हॉस्टल व्यवस्था पर भी चिंता जताई। कोर्ट के मुताबिक दिल्ली से बाहर से पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं हैं। इसी वजह से बड़ी संख्या में छात्र निजी PG में रहने को मजबूर होते हैं, जहां सुरक्षा मानकों की निगरानी एक बड़ा मुद्दा बन जाती है।
एक सप्ताह में PG और हॉस्टल का ऑडिट
दिल्ली हाई कोर्ट ने MCD को PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने व्यापक ऑडिट की जरूरत पर जोर देते हुए छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को सक्रिय कदम उठाने को कहा है।
DU से मांगी गई छात्रों और हॉस्टल की जानकारी
कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से यह भी जानकारी मांगी है कि उसके संस्थानों में बाहर से आने वाले कितने छात्र पढ़ते हैं और उनके लिए कितनी हॉस्टल सीटें उपलब्ध हैं। इसका उद्देश्य यह समझना है कि छात्र निजी PG पर किस हद तक निर्भर हैं और सुरक्षित आवास की कमी कितनी बड़ी समस्या है।
7 लोगों की मौत के बाद उठा सुरक्षा का बड़ा सवाल
सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के ढहने से अब तक 7 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। यह इमारत लड़कों के PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी और हादसे के समय इसमें मरम्मत का काम चल रहा था।
10 दिन में जवाब दाखिल करने का निर्देश
हाई कोर्ट ने संबंधित पक्षों को अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। कोर्ट में दाखिल याचिका में PG और हॉस्टल की संरचनात्मक सुरक्षा जांच तथा पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी की गई है।
हादसे ने दिल्ली में छात्र आवास व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
सत्य निकेतन हादसा अब केवल एक इमारत के गिरने की घटना तक सीमित नहीं रह गया है। हाई कोर्ट की टिप्पणी ने दिल्ली में PG, निजी हॉस्टल, भवन सुरक्षा और छात्रों के लिए सरकारी आवास की उपलब्धता से जुड़े व्यापक सवालों को सामने ला दिया है।